ऊर्जा संकट के बीच हवाई यात्रा को महंगी होने से बचाने के लिए कैबिनेट ने 10,000 करोड़ रुपए की सहायता को मंजूरी दी

Ashwini Vaishnaw : केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मीडिया को कैबिनेट की बैठक के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया के बीच हवाई यात्रा महंगी ना हो इसके लिए सरकार ने एक फंड बनाया है, जिसमें 10 हजार करोड़ रुपए की सहायता एक बार में दी जा रही है.

Ashwini Vaishnaw : केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों से मीडिया को अवगत कराते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संकट की वजह से विमानों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन (Aviation Turbine Fuel) की कीमतें बहुत तेजी से बढ़ गई हैं. मार्च 2026 में जहां विमान के ईंधन की कीमत करीब 60 रुपये प्रति लीटर थी वह मई में बढ़कर 142 रुपये प्रति लीटर हो गई. इस समस्या के निराकरण के लिए सरकार ने एटीएफ प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड (ATF Price Stabilisation Fund) बनाया है. इस फंड का उद्देश्य संकट के वक्त भी उचित कीमत पर ईंधन की आपूर्ति है.

हवाई यात्रा को महंगी होने से बचाने के लिए कैबिनेट ने 10,000 करोड़ रुपए की सहायता दी

अश्विनी वैष्णव ने बताया कि अभी ईंधन की कीमत 142 रुपये प्रति लीटर है. अगर एयरलाइंस को इसी कीमत पर ईंधन खरीदना पड़े, तो हवाई टिकट काफी महंगे हो सकते हैं. इस स्थिति से बचने और यात्रियों पर महंगे टिकट का बोझ ना पड़ने देने के लिए सरकार ने विमान के ईंधन की कीमत को 75.6 रुपए प्रति लीटर पर कैप कर दिया है. इससे एयरलाइंस को राहत मिली है और उड़ान सेवाएं भी प्रभावित नहीं हुई हैं. लेकिन इसका प्रभाव तेल बेचने वाली कंपनियों पर पड़ा है और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा पड़ रह है, क्योंकि उन्हें ईंधन उसी दाम पर मिल रहा है, जो वैश्विक बाजार में उसकी कीमत है. इसी वजह से सरकार ने एटीएफ प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड बनाया है, ताकि एयरलाइंस, यात्रियों और तेल बेचने वाली कंपनियों किसी पर भी अतिरिक्त बोझ ना पड़े. इस फंड में 10,000 करोड़ रुपए का मदद दिया जाएगा.

यह फंड कैसे काम करेगा?

संकट के दौरान एयरलाइंस को स्थिर और कम कीमत पर ईंधन मिलता रहेगा. तेल कंपनियों को होने वाले नुकसान की भरपाई इस फंड से की जाएगी. जब अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य हो जाएंगे और ईंधन की कीमतें कम हो जाएंगी, तब एक तय व्यवस्था के तहत यह राशि वापस की जाएगी. यानी सरकार ने ऐसा मॉडल बनाया है जिससे एयरलाइंस, तेल कंपनियां और यात्रियों तीनों को फायदा हो. सरकार का कहना है कि इस कदम से विमानन क्षेत्र में जुड़े लगभग 77 लाख रोजगारों को भी सुरक्षा मिलेगी और टिकटों की कीमतों में अचानक भारी बढ़ोतरी से बचा जा सकेगा.

NH-63 और NH-563 को चौड़ा करने की अनुमति

अश्विनी वैष्णव ने बताया कि कैबिनेट ने 3 जून को यह फैसला भी किया है कि तेलंगाना में NH-63 के आर्मूर-जगतियाल-मंचेरियल सेक्शन और NH-563 के जगतियाल-करीमनगर सेक्शन को 4 लेन स्टैंडर्ड तक चौड़ा किया जाएगा. यह प्रोजेक्ट 190.76 किमी लंबा है और इसमें कुल 7,597.16 करोड़ रुपये का निवेश होगा. अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यूनियन कैबिनेट ने रामेश्वर से पारादीप तक नए कोस्टल हाईवे के कंस्ट्रक्शन को भी मंजूरी दी है, जिसकी कुल लंबाई 163.180 किमी होगी. प्रोजेक्ट की कुल लागत 8300.79 करोड़ रुपये है.

पुराने ट्रकों और बसों को बदलने के लिए सरकार देगी मदद

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यूनियन कैबिनेट ने दिल्ली-एनसीआर में पुराने ट्रक और बसों को बदलने के लिए नेशनल कैपिटल रीजन प्लानिंग बोर्ड बनाने को मंजूरी दी है. इस स्कीम का मकसद दिल्ली-एनसीआर में एयर पॉल्यूशन कम करना और क्लीनर मोबिलिटी को बढ़ावा देना है.

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Published by: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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