अंकित शर्मा हत्याकांड: दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने खुफिया ब्यूरो (IB) अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व MCD पार्षद ताहिर हुसैन समेत सभी दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. अदालत ने दोषियों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 के तहत हत्या के अपराध में दोषी ठहराते हुए यह सजा दी. कोर्ट ने दोषियों को दंगा करने, घातक हथियारों के साथ दंगा करने, अपहरण और हत्या जैसे गंभीर अपराधों के लिए भी अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई. इसके अलावा अदालत ने ताहिर हुसैन पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है.
यह फैसला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के दौरान दयालपुर इलाके में हुई अंकित शर्मा की हत्या से जुड़े मामले में आया है. अंकित शर्मा का क्षत-विक्षत शव एक नाले से बरामद किया गया था.मामले में अदालत ने ताहिर हुसैन और चार अन्य आरोपियों को दोषी करार दिया था.
13 जुलाई को दोषी ठहराए गए थे ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपी
अदालत ने 13 जुलाई को ताहिर हुसैन और चार अन्य आरोपियों को अंकित शर्मा हत्याकांड में दोषी करार दिया था. इसके बाद 27 जुलाई को अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद सजा पर फैसला सुरक्षित रख लिया था.
अभियोजन पक्ष ने मांगी थी फांसी की सजा
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने ताहिर हुसैन और अन्य दोषियों के लिए मौत की सजा की मांग की थी. विशेष लोक अभियोजक (SPP) मधुकर पांडे ने दलील दी थी कि यह बेहद गंभीर और निर्मम अपराध है, जिसे दुर्लभतम मामलों की श्रेणी में रखा जा सकता है. अभियोजन ने कहा था कि हत्या जानबूझकर की गई थी और इसमें धारदार हथियार का इस्तेमाल किया गया. दलील दी गई कि अंकित शर्मा के शरीर पर 51 चोटों के निशान थे, जिनमें से कई चोटें जानलेवा थीं.
अभियोजन पक्ष ने अदालत में कहा था कि इस हत्या को केवल एक अलग घटना के तौर पर नहीं देखा जा सकता. इसे उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की पृष्ठभूमि में देखा जाना चाहिए, जिनमें 53 लोगों की मौत हुई थी. अभियोजन ने दोषियों के व्यवहार को देखते हुए कड़ी से कड़ी सजा की मांग की थी.
बचाव पक्ष ने की सजा में नरमी की अपील
वहीं, ताहिर हुसैन के वकील राजीव मोहन ने अदालत से सजा में नरमी बरतने की अपील की थी. उन्होंने कहा कि हर हत्या के मामले में मौत की सजा नहीं दी जा सकती और सजा तय करते समय अपराध से जुड़े सभी पहलुओं पर विचार किया जाना चाहिए. बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि इस मामले में 11 आरोपियों में से छह को अदालत ने बरी कर दिया है. वकील ने कहा कि ताहिर हुसैन को सामान्य इरादे और अन्य अपराधों के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है.
