Ambedkar Jayanti 2020: दलितों को सम्मान दिलाने वाले ' बाबा साहब अंबेडकर' के बारे में जानें कुछ खास बातें

Ambedkar Jayanti 2020, History, Birth Anniversary, samvidhan nirmata: भारतीय सविधान के पितामह कहे जाने वाले भीमराव अंबेडकर(BR Ambedkar) की जयंती 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती(Ambedkar Jayanti) के रूप में मनायी जाती है. अंबेडकर ने अपना सारा जीवन दलितो और पिछड़े समुदायों के उत्थान में लगा दिया. समाज सुधारक जो दलित है, उनको भारत में दलित बौद्ध आंदोलन के पीछे व्यापक रूप से श्रेय दिया जाता है.

Ambedkar Jayanti 2020, History, Birth Anniversary: भारतीय सविधान(Indian Constitution) के पितामह कहे जाने वाले भीमराव अंबेडकर(BR Ambedkar) की जयंती 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती(Ambedkar Jayanti) के रूप में मनायी जाती है. अंबेडकर ने अपना सारा जीवन दलितो और पिछड़े समुदायों के उत्थान में लगा दिया. समाज सुधारक जो दलित है, उनको भारत में दलित बौद्ध आंदोलन के पीछे व्यापक रूप से श्रेय दिया जाता है.

अंबेडकर का बचपन बहुत कठिनायी में बीता.जब उन्हें पढ़ने के लिए स्कूल भेजा गया तो उन्हे भेदभाव का सामना करना पड़ा. पढ़ाई में अब्बल होने के बाद भी उन्हें कक्षा के बहार खड़े होकर पढ़ना पढ़ता था.जातीय भेदभाव से उनके मन में इसका गहरा प्रभाव पड़ा.

इस व्यवस्था को दूर करने के लिए उन्होंने देश विदेश में उच्च शिक्षा ग्रहण की. बाद में डॉक्टर अंबेडकर ने तत्कालीन जातीय-सामाजिक व्यवस्था और व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ लोगों को जागरुक करने का कार्य किया.

उन्होंने अपने एक प्रसिद्द लेख में एक दलित लड़के के रूप में उनके साथ हुए भेदभाव पर पुरजोर प्रकाश डाला था. ‘ चपरासी नहीं तो पानी नहीं’ यह लेख उस समय को याद करता है.जब उनको स्कूल में घड़े में से पानी पीने से मना कर दिया जाता था जब तक की कोई उच्च जाति का व्यक्ति पानी नहीं पिला देता था.अगर चपरासी दूर होता या अनुपस्थित होता तो अंबेडकर पानी नहीं पी सकते थे.

1947 में भारत के स्वतंत्र होने के बाद उन्होंने कांग्रेस का भारत के कानून मंत्री बनने का प्रस्ताव मान लिया. 29 अगस्त 1947 को वे संविधान ड्राफ्टिंग कमेटी के चैयरमेन नियुक्त किए गए. 16 नवंबर 1949 को संविधान सभा ने संविधान को अपनाया. 6 दिसंबर 1956 को अंबेडकर का निधन हो गया.

भारतीय सविधान को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के अलावा, भारतीय रिज़र्व बैंक के गठन में भी अम्बेडकर का हाथ था.1990 में उन्हें मरणोपरांत सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार, भारत रत्न से सम्मानित किया गया था.

इस साल, बाबासाहेब की 129 वीं जयंती पर, राजनीतिक नेताओं ने देशवासियों से कहा कि वे गरीबों की मदद करें और कोरोनोवायरस महामारी की चपेट में आए और कोविद -19 लॉकडाउन उपायों का पालन करते हुए श्रद्धांजलि दें.

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Author: Mohan Singh

Published by: Prabhat Khabar

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