चुनाव चिह्न से हुई अजित पवार के शव की पहचान! प्रत्यक्षदर्शी ने बताई पूरी बात

Ajit Pawar : एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि विमान दुर्घटना के बाद अजित पवार के पार्थिव शरीर की पहचान उनकी कलाई घड़ी से हुई. जानें प्रत्यक्षदर्शियों ने और क्या बताया.

Ajit Pawar : महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की कलाई घड़ी पुणे जिले में विमान दुर्घटनास्थल पर उनकी पहचान करने में काफी मददगार साबित हुई. प्रत्यक्षदर्शियों की ओर से यह दावा किया जा रहा है. ग्रामीण जब घटनास्थल पर पहुंचे तो दुर्घटनाग्रस्त विमान का मलबा आग की लपटों में घिरा हुआ था. मलबा बारामती हवाई अड्डे पर रनवे के किनारे से 200 मीटर की दूरी पर बिखरा पड़ा था. प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया कि पवार की पहचान उनकी कलाई घड़ी से हुई. न्यूज एजेंसी पीटीआई ने यह खबर दी है.

‘घड़ी’ दिवंगत अजित पवार की पार्टी का चुनाव चिह्न

एक वायरल वीडियो में, एक व्यक्ति झुलसे हुए शव की कलाई घड़ी की ओर इशारा करते हुए दावा कर रहा है कि वह अजित पवार हैं. ‘घड़ी’ दिवंगत अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का चुनाव चिह्न है. पवार का अंतिम संस्कार गुरुवार को बारामती में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा. उनकी अंतिम यात्रा के लिए गाड़ी को फूलों से सजाया गया है.

किन लोगों की गई हादसे में जान

अजित पांच फरवरी को होने वाले जिला परिषद चुनाव के लिए पुणे जिले में चार रैलियों को संबोधित करने के वास्ते सुबह मुंबई से रवाना हुए थे. दुर्घटना में जान गंवाने वालों में कैप्टन सुमित कपूर भी शामिल हैं, जिनके पास 15,000 घंटे का उड़ान अनुभव था. 1,500 घंटे का उड़ान अनुभव रखने वाली सह-पायलट कैप्टन शांभवी पाठक, निजी सुरक्षा अधिकारी (पीएसओ) विधिप जाधव और विमान परिचारिका पिंकी माली की भी हादसे में मौत हो गई.

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दुर्घटना थी और इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए : शरद पवार

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार और चार अन्य लोगों की बुधवार सुबह पुणे जिले में बारामती हवाई अड्डे के पास विमान दुर्घटना में मौत हो गई. 66 साल के अजित पवार के निधन से न केवल महाराष्ट्र में भाजपा के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार में एक बड़ा खालीपन पैदा हुआ है, बल्कि उनकी अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के भविष्य पर भी सवाल खड़े हो गए हैं. अजित पवार के चाचा और एनसीपी के संस्थापक शरद पवार ने कहा कि यह एक दुर्घटना थी और इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए.

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By Amitabh kumar

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