दिल्ली से बेंगलुरु जा रहा एयर इंडिया का विमान टेल स्ट्राइक का शिकार, समझिए क्यों बनती है यह स्थिति

Air India: दिल्ली से बेंगलुरु जा रहा एयर इंडिया का एक विमान दुर्घटनाग्रस्त होने से बाल-बाल तब बचा, जब उसकी लैंडिंग हो रही थी. लैंडिंग के वक्त विमान टेल स्ट्राइक का शिकार हो गया.

Air India: एयर एंडिया के एक विमान (AI2651)का पिछला हिस्सा लैंडिंग के दौरान रनवे से टकरा गया. यह विमान दिल्ली से बेंगलुरु जा रहा था. हालांकि विमान की लैंडिंग सुरक्षित तरीके से हो गई और किसी भी यात्री को कोई नुकसान नहीं हुआ है.

टेल स्ट्राइक की जांच शुरू

एयर इंडिया के प्रवक्ता ने बताया कि गुरुवार को एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान रनवे पर टेल स्ट्राइक हुआ. यानी विमान का पिछला हिस्सा रनवे से टकरा गया. इसके बाद दिल्ली से बेंगलुरु जा रहे एयर इंडिया के एक एयरक्राफ्ट को कैंसिल कर दिया गया है. टेल स्ट्राइक क्यों हुआ, इसकी जांच संबंधित अधिकारियों ने शुरू कर दी है.

ऑपरेटिंग पायलटों को रोस्टर से हटाया गया

एयर इंडिया के एक अधिकारी ने बताया कि टेल स्ट्राइक की घटना के बाद ऑपरेटिंग पायलटों को जांच पेंडिंग रहने तक रोस्टर से हटा दिया गया है. ऐसा सुरक्षा उपायों के तहत किया गया है. एयर इंडिया ने घटना की पुष्टि की और कहा कि 21 मई को दिल्ली से बेंगलुरु जा रही फ्लाइट AI2651 की लैंडिंग के दौरान टेल-स्ट्राइक हुई. एयरक्राफ्ट सुरक्षित रूप से लैंड हो गया और सभी पैसेंजर और क्रू नॉर्मल तरीके से उतर गए. प्रभावित यात्रियों के ठहरने का इंतजाम कर दिया गया है.

टेल स्ट्राइक क्या है?

टेल-स्ट्राइक उस स्थिति को कहते हैं जब विमान का पिछला हिस्सा लैंडिंग या टेक-ऑफ) के दौरान रनवे से टकरा जाए. यह टकराव आमतौर पर विमान को ज्यादा एंगल पर उतारने या हवा में उड़ाने पर होता है.

टेल-स्ट्राइक क्यों होता है?

टेल स्ट्राइक की घटना तब होती है जब तेज हवा चल रही हो. क्रॉसविंड जैसी स्थिति हो या फिर लैंडिंग के समय विमान का एंगल ज्यादा हो. लैंडिग के समय पायलट, हवा को देखते हुए विमान के पंखों को झुकाते हैं, वही एंगल बनाता है. यह भी संभव है कि पायलट की टाइमिंग गलत हो, जिसकी वजह से पिछला हिस्सा जमीन से टकरा गया.

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By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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