मुख्य सूचना आयुक्त के पास आयुक्तों का तबादला करने की शक्ति है : हाईकोर्ट

मुंबई : बंबई उच्च न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि सूचना के अधिकार कानून के तहत राज्य मुख्य सूचना आयुक्त को शक्ति है कि वह आयोग के काम-काज सुचारु रुप से चलाने के लिए राज्य सूचना आयुक्तों का तबादला एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में कर सकता है. न्यायमूर्ति वीएम कनाडे की अध्यक्षता वाली पीठ […]

मुंबई : बंबई उच्च न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि सूचना के अधिकार कानून के तहत राज्य मुख्य सूचना आयुक्त को शक्ति है कि वह आयोग के काम-काज सुचारु रुप से चलाने के लिए राज्य सूचना आयुक्तों का तबादला एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में कर सकता है.

न्यायमूर्ति वीएम कनाडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह अहम व्यवस्था दी है कि आरटीआई कानून की धारा 15 (4) के तहत राज्य मुख्य सूचना आयुक्त के पास ऐसी शक्ति है कि वह राज्य सूचना आयुक्तों का एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में तबादला कर सकते हैं.
पीठ पुणे के पत्रकार विजय कुंभार की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. कुंभार ने अमरावती में पदस्थ राज्य सूचना आयुक्त रविंद्र जाधव के दूसरे स्थान पर तबादला करने को चुनौती दी थी.
जाधव ने अपने स्थानांतरण को चुनौती नहीं दी थी लेकिन कुंभार ने अमरावती से अन्य स्थान पर उनके तबादले को इस आधार पर चुनौती दी कि राज्य मुख्य सूचना अधिकारी के पास आरटीआई कानून के तहत राज्य सूचना आयुक्तों का तबादला करने की शक्ति नहीं है.
उच्च न्यायालय इस बात से संतुष्ट था कि याचिकाकर्ता एक जिम्मेदार कार्यकर्ता है और इसलिए इसने उन्हें यह अर्जी एक जनहित याचिका के तौर पर दायर करने की अनुमति प्रदान की.
पीठ ने व्यवस्था दी, ‘‘हमारे विचार से, राज्य मुख्य सूचना आयुक्त को आरटीआई कानून की धारा 15 (4) के तहत राज्य सूचना आयुक्तों का एक स्थान से दूसरे स्थान पर तबादला करने की शक्ति है ताकि राज्य में आयोग का कामकाज सुचारु रूप से चलना सुश्निचित हो सके.” पीठ ने कहा कि अगर उनके अधिकार में कोई भी नियंत्रण किया जाता है तो राज्य सूचना आयोग होने का मूल उद्देश्य ही निरर्थक और परास्त हो जाएगा। हमें याचिका में कोई दम नहीं दिखता है.
इसने कहा, ‘‘ लिहाजा याचिका खारिज की जाती है और पहले के अतंरिम आदेश को निरस्त किया जाता है.” पीठ ने कहा कि यह याद रखना चाहिए कि आरटीआई कानून को सरकार और उसके अंगों के कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पारित किया गया था। एक लोकतांत्रिक देश में, नागरिकों को सरकार और उनके अधिकारियों के कामकाज के बारे में सूचित करना जरुरी है ताकि मनमाने ढंग से किसी कार्रवाई की गुंजाइश न रहे और भ्रष्टाचार पर भी लगाम कसे तथा अंत में सरकार और उसके अंगों को जवाबदेह ठहराए.

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