12 लाख की जमा-पूंजी पर चूहों का कहर! संदूक खोला तो कुतरे मिले नोट,सदमे में बेहोश हुई महिला

गोंडा से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने 8 साल से संदूक में जमा किए 12 लाख रुपये चूहे द्वारा कुतरे जाने से बर्बाद हो गए, जानिए पूरा मामला.

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. वायरल वीडियो के मुताबिक, एक महिला पिछले 8 वर्षों से लोहे के एक संदूक में पैसे जमा कर रही थी. परिवार का कहना है कि उसने यह रकम भविष्य में सोने के गहने खरीदने के लिए बचाकर रख रही थी. लेकिन जब महिला ने संदूक खोला तो अंदर रखे नोटों की हालत देखकर उसके होश उड़ गए और वह बेहोश होकर गिर पड़ी.

12 लाख रुपये के नुकसान का दावा

परिवार की ओर से करीब 12 लाख रुपये के नोट खराब होने का दावा किया जा रहा है. हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि संदूक में कुल कितनी नकदी रखी गई थी और उसमें से कितनी रकम के नोट पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं. इसलिए फिलहाल 12 लाख रुपये के नुकसान को केवल दावा ही माना जाना चाहिए, आधिकारिक नुकसान नहीं.

पति से छिपाकर बचत रही थी पत्नी

सोशल मीडिया पर यह भी दावा किया जा रहा है कि महिला अपने पति से छिपाकर 8 वर्षों से पैसे जमा कर रही थी. ताकि भविष्य में वह इन पैसों से सोने के गहने खरीद सके.

अब बैंक से नोट बदलने की उम्मीद

इन क्षतिग्रस्त नोटों को लेकर परिवार के सामने अब सवाल है कि क्या इन्हें बैंक में बदला जा सकता है. ऐसे मामलों में नोटों की स्थिति और लागू नियमों के आधार पर बैंक प्रक्रिया तय करता है. परिवार संबंधित बैंक शाखा से संपर्क कर क्षतिग्रस्त नोटों की जांच और उन्हें बदलने की सोच रहा है.

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By सत्येन्द्र गिरि

सत्येन्द्र गिरि प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. यहां वे मुख्य रूप से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों से जुड़ी खबरों का लेखन करते हैं. सरल, तथ्यात्मक और पाठक-केंद्रित लेखन उनकी प्रमुख पहचान है. उन्होंने एशिया के प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से मास्टर ऑफ आर्ट्स इन मास कम्युनिकेशन (बैच 2023–25) की डिग्री प्राप्त की है.

पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, डिजिटल मीडिया, रिपोर्टिंग और समसामयिक विषयों की गहन समझ विकसित की. पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके पास एक वर्ष का पेशेवर अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला के गोरखपुर एडिशन से की, जहां समाचार लेखन और रिपोर्टिंग की बारीकियों को नजदीक से सीखने और समझने का अवसर मिला. इसके बाद उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता में कदम रखते हुए प्रभात खबर डिजिटल से जुड़कर देश-विदेश की महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य शुरू किया.

सत्येन्द्र की विशेष रुचि इतिहास, अंतरराष्ट्रीय संबंध, राजनीति, कूटनीति और समसामयिक घटनाक्रम से जुड़े विषयों में है. वे जटिल और गंभीर मुद्दों को भी सरल, संतुलित और विश्वसनीय तरीके से प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं. राष्ट्रीय और वैश्विक घटनाओं पर उनकी गहरी नजर रहती है तथा वे तथ्यपरक और निष्पक्ष पत्रकारिता को अपनी कार्यशैली का आधार मानते हैं. वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के निवासी हैं.

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