नयी दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज सरकार और दिल्ली पुलिस को आडे हाथ लेते हुए पूछा कि राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा बढाने के लिए सीसीटीवी कैमरे क्यों नहीं लगाए गए जबकि एक राष्ट्रप्रमुख के दौरे के लिए सीसीटीवी कैमरे लगा दिये गये. न्यायमूर्ति बादर दुरेज अहमद और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने कहा, ‘सीसीटीवी कैमरे खरीदिए और लगाइए. आप महिलाओं की सुरक्षा के लिए कैमरे क्यों नहीं खरीद सकते?
अगर आप दौरा करने वाले राष्ट्रप्रमुखों के लिए ऐसा कर सकते हैं तो आप राजधानी में सुरक्षा मांगने वाली महिलाओं और बच्चों के लिए ऐसा क्यों नहीं कर सकते हैं.’ अदालत ने बल में अतिरिक्त पद सृजित करने के लिए केंद्र और दिल्ली पुलिस की तरफ से ‘प्रगति की कमी’ पर नाखुशी जताई. अदालत ने कहा, ‘आपमें से किसी की रुचि नहीं है.
आप यह नहीं चाहते हैं. गृह मंत्रालय कुछ व्यर्थ कारणों से ऐसा नहीं करना चाहता है.’ अदालत अधिवक्ता मीरा भाटिया द्वारा दायर शिकायत पर सुनवाई कर रही थी जिसमें मांग की गई कि 16 दिसंबर सामूहिक बलात्कार जैसे कई मामलों को ध्यान में रखते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की सुरक्षा के लिए लगाए गए 15 हजार सीसीटीवी कैमरे नहीं हटाए जाएं.
