नयी दिल्ली:कांग्रेस पार्टी के अंदर आपस में ही ठन गई है. पार्टी के युवा और वरिष्ठ सदस्य राहुल गांधी को लेकर आमने सामने आ गए हैं. लोकसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद पार्टी के अंदर भी बिखराव नजर आ रहा है.
दरअसल कांग्रेस की इस हार के बाद राहुल की लोकप्रियता तेजी से घटने लगी. देश भर में कांग्रेस के नेता खासकर वरिष्ठ नेता राहुल के नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं. इन सबके बीच राहुल की युवा टीम के 14 सचिव उनके बचाव में खड़ी हो गई है.
जनार्दन द्विवेदी और दिग्विजय सिंह जैसे वरिष्ठ नेताओं ने राहुल के संबंध बयान दिया जिसके बाद युवा टीम राहुल के पक्ष में खड़ी हो गई है.
हाल ही में इन 14 सचिवों ने शीर्ष नेतृत्व को पत्र लिखकर कहा था कि वे राहुल के संबंध में सार्वजनिक रूप स कुछ भी ना कहें. इधर वरिष्ठ सदस्यों ने भी खुद को एक जुट कर लिया है. इन 14 सचिवों में से 13 सचिव राहुल के लीडरशिप प्रोग्राम के वजेता हैं. जबकि एक पहले लोजपा में थे.
लगता है इन युवा नेताओं ने हर हाल में राहुल का साथ देने की ठान ली है. होने वाले विधानसभा चुनावों और पार्टी के भीतर होने वाले चुनावों से पहले ये नेता राहुल को मजबूत नेता के तौर पर पेश करना चाहते हैं. तभी तो इन्होंने वरिष्ठ नेताओं को कठघरे में खडा़ किया गया है.
वहीं वरिष्ठ सदस्य किसी भी हालत में हार मानने को तैयार नहीं हैं.वरिष्ठ नेतृत्व ने युवा टीम को कहा है कि वो आगे सार्वजनिक तौर पर कुछ भी ना बोलें.
पार्टी के भीतर चल रही इस गहमागहमी पर एआईसीसी के सदस्य और पार्टी की छात्र इकाई के पूर्व नेता मोहम्मद शमीम अख्तर का कहना है राहुल गांधी के नेतृत्व पर किसी का विशेषाधिकार नहीं है. चाहे वो वरिष्ठ सदस्य हों अथवा युवा.
दरअसल 14 सचिवों में से 13 सचिव राहुल गांधी के बेहद करीबी हैं. इन 13 सचिवों को यूथ कांग्रेस टैलेंट हंट प्रोग्राम के बाद पार्टी में शामिल किया था. इनमें से कुछ जमीनी नेता के तौर पर जाने जाते हैं. तो कुछ को राहुल की जी हुजूरी करने वाला माना जाता है.
महाचचिवों के लिखे गए पत्र में गुजरात के परेश धनानी हैं वो गुजरात यूथ कांग्रेस के सचिव रह चुके हैं. पंजाब के विधायकर कुलजीत सिंह नागरा यूपी के विधायक संजय कपूर हैं. इसके अलावा गोवा के गिरीश चोंडकर, उत्तराखंड के प्रकाश जोशी पश्चिम बंगाल के शुभंकर सकार,असम के भूपेन बोरा और राणा गोस्वामी,राजस्थान के पूर्व एनएसयूआई चीफ जुबैर खान, पूरवन सांसद हरीश चौधरी दिल्ली के विधायक नसीब सिंह और तमिलनी़डु के पूर्व विधायक चेल्लाकुमार हैं. सूरज हेगड़े कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री देवाराज के उर्स के पोते सूरज हेगड़े भी हैं
अब देखना ये है कि पार्टी के अंदर मचे इस घमासान का कोई हल निकल भी पाता है या नहीं .
