नयी दिल्ली: कांग्रेस पार्टी में आतंरिक कलह अब खुलकर सामने आने लगी है. उपाध्यक्ष राहुल गांधी को लेकर पार्टी नेताओं में दो फाड़ हो गया है. पार्टी के वरिष्ठ नेता जहां लोकसभा चुनाव में हार के लिए राहुल को दोषीवार ठहरा रहे हैं वहीं अब राहुल के समर्थन में कांग्रेस की युवा टीम आगे आ […]
नयी दिल्ली: कांग्रेस पार्टी में आतंरिक कलह अब खुलकर सामने आने लगी है. उपाध्यक्ष राहुल गांधी को लेकर पार्टी नेताओं में दो फाड़ हो गया है. पार्टी के वरिष्ठ नेता जहां लोकसभा चुनाव में हार के लिए राहुल को दोषीवार ठहरा रहे हैं वहीं अब राहुल के समर्थन में कांग्रेस की युवा टीम आगे आ गयी है.
राहुल गांधी का समर्थन जताते हुए और बुजुर्ग पार्टी नेताओं के खिलाफ युवा कांग्रेस नेताओं के एक समूह ने वरिष्ठ नेताओं को पत्र लिखकर यह संदेश देने का फैसला किया है कि पार्टी की छवि को नुकसान नहीं पहुंचाएं और विवादास्पद बयान पार्टी के बाहर नहीं दें. इन युवा नेताओं में 15 से ज्यादा एआईसीसी के सचिव हैं जो पार्टी के वरिष्ठ महासचिवों समेत पुराने नेताओं को पत्र लिखकर कहेंगे कि पार्टी और उसके नेतृत्व को नुकसान पहुंचाने वाला कोई काम नहीं किया जाए.
पार्टी ने पहले ही जनार्दन द्विवेदी और दिग्विजय सिंह की टिप्पणियों से किनारा कर लिया है. द्विवेदी ने नेताओं के रिटायरमेंट की उम्र सीमा तय किये जाने संबंधी बयान दिया था वहीं दिग्विजय सिंह ने कहा था कि अहम मुद्दों पर राहुल गांधी की खामोशी ही धारणाओं की लडाई में पार्टी की हार का कारण बनी. इन युवा नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी को राजनीति में और सक्रिय होना चाहिए.
आज या कल सभी महासचिवों और वरिष्ठ नेताओं को भेजे जाने वाले पत्रों में युवा नेता अपने वरिष्ठों से कहेंगे कि नेतृत्व पर हमला नहीं करें और मीडिया में विवादास्पद बयान देने से बचें. सूत्रों के अनुसार पार्टी मुख्यालय में हुई कांग्रेस सचिवों की बैठक में पत्र की विषयवस्तु को तय किया गया. ऐसा पहली बार होगा कि एआईसीसी के सचिव अपने आला महासचिवों को पत्र लिखकर उनमें से कुछ के विचारों पर असहमति जताएंगे.
राहुल के चुने हुए एआईसीसी सचिव प्रकाश जोशी ने सबसे पहले निशाना साधा और कहा, सार्वजनिक बयान दे रहे सभी नेताओं को पहले आत्मनिरीक्षण करना चाहिए कि उन्हें दी गयी जिम्मेदारी उन्होंने किस हद तक निभाई. जोशी ने कहा, अगर राहुलजी निर्णय लेने की प्रक्रिया में कार्यकर्ताओं की आवाज को शामिल करना चाहते हैं तो इसमें क्या गलत है. हम पूरी तरह उनके साथ हैं, भले ही उन्हें कुछ कडे फैसले लेने पडें. सचिवों ने कांग्रेस कार्यालय से बाहर बैठक की और लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की बुरी तरह पराजय के बाद से कई पार्टी नेताओं की ओर से दिये गये विवादास्पद बयानों पर चर्चा की.
खबरों के अनुसार पूर्व मंत्री किशोर चंद्र देव ने कहा था कि राहुल गांधी के विचार लोकसभा चुनाव में उल्टे पडे. कांग्रेस कार्यसमिति के पूर्व सदस्य जगमीर बरार के बयानों को लेकर पार्टी ने हाल ही में उन्हें निकाल दिया था. पार्टी सूत्रों ने संकेत दिया है कि लोकसभा चुनावों में हार के बाद एआईसीसी के पुनर्गठन की कवायद के बाद इसकी कमान युवा नेतृत्व अपने हाथों में लेने को तैयार है.
बैठक में भाग लेने वाले एक और पार्टी सचिव ने कहा, लोकसभा चुनावों के बाद कुछ वरिष्ठ नेता एक के बाद एक बयान दे रहे हैं. यह सही नहीं है. ये सभी नेता फैसले लेने में शामिल थे. उन्हें जो कहना है, पार्टी फोरम पर कहना चाहिए. बैठक में कुछ सचिवों ने पूर्व सांसद मिलिंद देवडा की आलोचना की जिन्होंने अपने ट्वीट में राहुल गांधी के सलाहकारों की भूमिका पर सवाल उठाया था.
पार्टी प्रवक्ता शोभा ओझा ने कहा, राहुल जी हमारे नेतृत्व हैं. पार्टी उनके नेतृत्व के तहत आगे बढेगी और हम सत्ता में वापसी करेंगे ….राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर कोई शंका नहीं है. हम उनके अधीन काम करेंगे और पार्टी को आगे ले जायेंगे.