नयी दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने नीतीश कटारा हत्याकांड में उम्रकैद की सजा पाए तीन मुजरिमों में एक विशाल यादव को, दो जमानत और उसके भाई का पासपोर्ट लौटाने की उसकी मांग पर तत्काल राहत देने से आज इनकार कर दिया.
न्यायमूर्ति गीता मित्तल और न्यायमूर्ति दीपा शर्मा की अवकाशकालीन पीठ ने हालांकि दिल्ली उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को विशाल के आवेदन पर नोटिस जारी किया. रजिस्ट्रार जनरल के पास ही जमानत के दस्तावेज जमा किए गए थे. विशाल का आग्रह है कि उसके भाई विवेक यादव के पासपोर्ट समेत मूल दस्तावेज प्राथमिकता के आधार पर जारी किए जाएं.
इस आवेदन पर सुनवाई के दौरान पीठ ने यह कहते हुए इस मामले को चार जुलाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया कि ऐसी कोई अत्यावश्यकता नहीं है. अदालत ने 16 मई को एक लाख रुपए के निजी मुचलके और उतनी ही राशि के दो मुचलके पर विशाल को अपने भाई की शादी के लिए 10 दिन का पेरौल दिया था.विवेक और विरेंद्र सिंह यादव ने जेल से विशाल को रिहा करवाने के लिए एक एक लाख रुपए और अपने मूल दस्तावेज सौंप दिए थे. विशाल को विवेक की शादी में शामिल होना था जो 24 को थी.
हाल ही में न्यायमूर्ति मित्तल और न्यायमूर्ति जे आर मिधा ने निचली अदालत के उस फैसले को सही ठहराया था जिसमें विशाल, उसके चचेरे भाई विकास और सुखदेव पहलवान को अपहरण एवं हत्या का दोषी ठहराया गया था. निचली अदालत ने मई, 2008 में इन तीनों को नीतीश कटारा की हत्या के जुर्म में उम्रकैद की सजा सुनायी थी.
उच्च न्यायायल ने 3 अप्रैल को अपने फैसले में कहा था कि 12 फरवरी, 2002 की रात को विकास, विशाल और पहलवान ने नीतीश को अगवा कर उसकी हत्या कर दी थी क्योंकि उन्हें नीतीश का विकास की बहन और डी पी यादव की बेटी भारती से उसका प्रेम संबंध मंजूर नहीं था और उसके मूल में यह बात थी कि दोनों अलग अलग जातियों के थे.
