‘मोदीकेयर’ के रेट पर निजी अस्पतालों को आपत्ति, कहा इस रेट पर उपलब्ध नहीं करा सकते क्वालिटी स्वास्थ्य सुविधा

नयी दिल्ली : ‘आयुष्मान भारत’ के तहत कई बीमारियों के इलाज हेतु जो फीस निर्धारित की गयी है, उसपर कई बड़े निजी अस्पताल फोर्टिस, अपोलो और मेदांता ने चिंता जतायी है. इन अस्पतालों का कहना है कि जो फीस तय की गयी है वह हमारे लिए उचित नहीं है. इस मुद्दे को लेकर इन प्राइवेट […]


नयी दिल्ली :
‘आयुष्मान भारत’ के तहत कई बीमारियों के इलाज हेतु जो फीस निर्धारित की गयी है, उसपर कई बड़े निजी अस्पताल फोर्टिस, अपोलो और मेदांता ने चिंता जतायी है. इन अस्पतालों का कहना है कि जो फीस तय की गयी है वह हमारे लिए उचित नहीं है. इस मुद्दे को लेकर इन प्राइवेट अस्पताल के सीनियर एक्सक्यूटिव नीति आयोग और स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों से मिले और अपनी चिंता जतायी. इनका कहना है कि जो रेट तय की गयी है वह वैज्ञानिक तरीके से सही नहीं है. इस स्थिति में हम क्वालिटी हेल्थकेयर उपलब्ध नहीं करा पायेंगे. इस संबंध में एक पत्र ‘आयुष्मान भारत’ के सीईओ को लिखा गया है.

हालांकि इस मसले पर सीईओ ने कहा है कि सरकार ने रेट को ध्यानपूर्वक तय किया है. यह राष्ट्रीय स्तर पर किया गया है. हमने राज्यों को यह छूट दी है कि वे रेट में 10 प्रतिशत तक बदलाव कर सकते हैं. साथ ही निजी अस्पतालों के लिए यह 30 प्रतिशत तक है.
नीति आयोग के सदस्य डॉ वीके पॉल ने टाइम्स आफ इंडिया को बताया कि हमारी प्राथमकिता स्वास्थ्य सुविधाओं को स्तरीय बनाना है विशेषकर टीयर-2 और टीयर -3 क्लास के शहरों में. निजी अस्पताल कई तरीकों से पैसे कमाते हैं, वे रेट में कमी ला सकते हैं, बशर्ते कि वे अतिरिक्त वसूली बंद कर दें.
हालांकि निजी अस्पताल इस बात पर राजी नहीं हैं, उनका कहना है कि अगर आप क्वालिटी हेल्थकेयर चाहते हैं तो आपको पैसे खर्च करने होंगे. हम उम्मीद करते हैं कि जिन स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए दर बहुत कम तय किये गये हैं उनपर सरकार विचार करेगी और दर फिर से निर्धारित किये जायेंगे.

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