नयी दिल्ली : सोलहवीं लोकसभा में चुने गए लगभग 75 फीसदी सांसदों के पास कम से कम स्नातक की डिग्री है जबकि 10 फीसदी सांसद सिर्फ दसवीं पास हैं. यह संख्या 15वीं लोकसभा से कुछ कम है क्योंकि उसमें 79 फीसदी सांसदों के पास स्नातक की डिग्री थी. हालांकि सिर्फ दसवीं तक पढे हुए सांसदों की संख्या घटकर महज 10 फीसदी रह गई है. पीआरएस लेजिसिलेटिव रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रतिशत पिछली लोकसभा में 17 फीसदी था.
डॉक्टरेट डिग्री वाले सदस्यों की संख्या 2014 के चुनावों में बढकर 6 फीसदी हो गई है. यह संख्या पिछली लोकसभा में 3 फीसदी थी. यहां मजेदार बात यह है कि 2014 के आम चुनावों में चुने गए वे सांसद, जो 10वीं पास नहीं हैं, उनकी संख्या में भी वृद्धि हुई है. इस बार यह संख्या 13 फीसदी है जबकि पिछली लोकसभा में इनकी संख्या 3 फीसदी थी. रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘वर्ष 2014 के आम चुनावों में चुने गए 543 सांसदों में से 75 फीसदी के पास कम से कम स्नातक की डिग्री है. यह संख्या 15वीं लोकसभा से कम है. 15वीं लोकसभा में 79 फीसदी सांसद स्नातक थे.’’
इसके अलावा 16वीं लोकसभा में चुने गए 27 फीसदी सांसदों ने अपना मूल पेशा कृषि बताया है. इसके बाद 24 फीसदी ने राजनैतिक और सामाजिक कार्यों को और 20 फीसदी ने उद्यम को अपना मूल पेशा बताया है. 2009 के लोकसभा चुनावों में 28 फीसदी सांसदों ने राजनैतिक और सामाजिक कार्यों को, 27 फीसदी ने कृषि को और 15 फीसदी ने उद्यम को अपना मूल पेशा बताया था. यदि 1952 में हुए पहले लोकसभा चुनावों पर नजर डाली जाए तो सबसे ज्यादा 36 फीसदी सांसदों ने अपना मूल पेशा वकालत बताया था. इसके बाद 22 फीसदी ने कृषि और 12 फीसदी ने उद्यम को अपना मूल पेशा बताया था. वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने अपने दम पर 272 का आंकडा आराम से पार करते हुए 282 सीटें बिना सहयोगियों के जीत लीं.
