..तो इन वजहों से सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले मुख्यमंत्री बने पवन कुमार चामलिंग

नयी दिल्ली : उत्तर पूर्व के सबसे शांत, खूबसूरत, संपन्न और शिक्षित राज्य के नेता के तौर पर एक नया रिकॉर्ड बनाने वाले सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग बेदाग राजनीतिक छवि और समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने की ललक के साथ सत्ता के अजेय रथ पर सवार हैं और खुद उनके विरोधी तक […]

नयी दिल्ली : उत्तर पूर्व के सबसे शांत, खूबसूरत, संपन्न और शिक्षित राज्य के नेता के तौर पर एक नया रिकॉर्ड बनाने वाले सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग बेदाग राजनीतिक छवि और समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने की ललक के साथ सत्ता के अजेय रथ पर सवार हैं और खुद उनके विरोधी तक मानते हैं कि उनसे मुकाबला मुश्किल है.

एक सामान्य नेपाली परिवार में जन्मे चामलिंग को जनता के साथ सीधे जुड़ाव ने देश के किसी राज्य में सबसे लंबे समय तक शासन करने वाला मुख्यमंत्री बना दिया. 28 अप्रैल को उन्होंने पश्चिम बंगाल के ज्योति बसु का 23 साल और 137 दिनों तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड तोड़ दिया. राजनीति के माहिर खिलाड़ी चामलिंग ने अपने गुरु और पूर्व मुख्यमंत्री नर बहादुर भंडारी के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंका और उन्हें सत्ता से बेदखल कर उनकी कुर्सी पर कब्जा कर लिया. शायद इसी लिए उन्हें बागियों से निबटने की कला में माहिर माना जाता है.
उनका यह हुनर 2014 में काम आया जब उनके पूर्व सहयोगी और एसकेएम के नेता प्रेम सिंह तमांग ने उनके खिलाफ बगावत कर दी. लेकिन तमांग को यह बगावत बहुत भारी पड़ी और कुछ समय की राजनीतिक उठापटक के बाद आखिरकार उन्हें भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल जाना पड़ा. चामलिंग पहली बार 12 दिसंबर, 1994 को मुख्यमंत्री बने थे और उसके बाद से सत्ता के गलियारों पर उनका कब्जा बरकरार है. यह उनका लगातार पांचवां कार्यकाल है.
राजनीति की समझ रखने वाले मानते हैं कि इतने लंबे शासन के बावजूद सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट के इस नेता को चुनौती देने वाला दूर – दूर तक कोई नहीं है. वैसे इस बात में भी दो राय नहीं कि चामलिंग इसलिए अजेय नहीं हैं कि उन्हें चुनौती देने वाली कोई मजबूत शख्सियत नहीं है. दरअसल चामलिंग के शासन का तरीका और राज्य में किए गए विकास कार्यों ने उन्हें जनता के बीच इस कदर लोकप्रिय बना दिया है कि जनता को उनके सिवाय कोई दिखता ही नहीं. चामलिंग का जन्म 22 सितंबर, 1950 को सिक्किम के एक छोटे और बेहद पिछ्ड़े गांव यंगयंग में हुआ था. पवन कुमार चामलिंग ने केवल मैट्रिक तक ही पढ़ाई की है.
वर्ष 1972 में राजनीति में आने से पहले वह किसान और प्रथम श्रेणी के ठेकेदार रह चुके हैं. पवन कुमार चामलिंग नेपाली भाषा के एक सम्माननीय लेखक हैं. इनका साहित्यिक नाम पवन कुमार चामलिंग ‘किरण’ है. सिक्किम यूनिवर्सिटी के अंतरराष्ट्रीय संबंध विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर मनीष कहते हैं, "मामूली नेपाली परिवार से ताल्लुक रखने वाले चामलिंग "भाषा ना भात्य (भाषा से ज्यादा हमारे लिए पेट भरने का अन्न मायने रखता है) का नारा देकर सत्ता में आए और समाज के सभी वर्गों को नेतृत्व प्रदान करने में कामयाब रहे.
” इंस्टीट्यूट फॉर कॉम्पिटीटिवनेस के चेयरमैन अमित कपूर कहते हैं, "राज्य ने कई सामाजिक मानकों पर देश के औसत से भी बेहतर प्रदर्शन किया है और सामाजिक उन्नति सूचकांक को लेकर हुए हमारे विश्लेषण से भी ऐसा ही जाहिर होता है. चामलिंग के शासन काल में सिक्किम की सकल घरेलू आय लगातार बढ़ रही है और वह राष्ट्रीय औसत से दोगुनी से भी ज्यादा है. प्रति व्यक्ति आय के मामले में सिक्किम का स्थान देश में तीसरा है. देश में प्रति व्यक्ति आय 1,03,219 रूपये है, वहीं सिक्किम में यह दोगुनी से ज्यादा 2,10,394 रुपये है. चामलिंग के सत्ता में आने के बाद से गरीबी रेखा के नीचे जीवन बसर करने वाले लोगों की संख्या 40 प्रतिशत से घटकर अब मात्र 8 प्रतिशत रह गई है. चामलिंग कहते हैं, "2020 तक राज्य में हर व्यक्ति के पास एक मंजिला पक्का घर हो जाएगा। हमने 90 फीसदी काम पूरा कर लिया है.”

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