कठुआ गैंगरेप : बार कौंसिल अॅाफ इंडिया के अध्यक्ष पहुंचे जम्मू-कश्मीर, पीड़िता के वकील से मिलेंगे

नयी दिल्ली :बार कौंसिल अॅाफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने आज कहा कि उन्नाव गैंगरेप मामले में जम्मू -कश्मीर बार कौंसिल के सदस्यों पर जिस तरह का आरोप लगा है, उसपर मैं जांच कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहूंगा. हमें पीड़िता के वकील से भी बात करनी होगी. गौरतलब है […]


नयी दिल्ली :
बार कौंसिल अॅाफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने आज कहा कि उन्नाव गैंगरेप मामले में जम्मू -कश्मीर बार कौंसिल के सदस्यों पर जिस तरह का आरोप लगा है, उसपर मैं जांच कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहूंगा. हमें पीड़िता के वकील से भी बात करनी होगी. गौरतलब है कि बार कौंसिल के वकीलों पर यह आरोप लगा था कि उन्होंने क्राइम ब्रांच के अधिकारियों को इस केस में चार्टशीट दायर करने से रोकने की कोशिश की थी और आरोपियों के पक्ष में जम्मू बंद का आयोजन किया, साथ ही पीड़िता की वकील दीपिका सिंह राजावत को धमकाने की कोशिश भी की.

कठुआ गैंगरेप पीड़िता की पहचान उजागर करने के मामले में आज कई मीडिया हाउस ने दिल्ली हाई कोर्ट के सामने माफी मांगी.इससे पहले कोर्ट ने इन मीडिया हाउस को पीड़िता की पहचान उजागकर करने के मामले में नोटिस भेजा था. कोर्ट ने हरेक मीडिया हाउस को निर्देश दिया कि वे पीड़ित मुआवजा कोष में 10 -10 लाख रुपये जमा करायें. मीडिया हाउस की पैरवी कर रहे वकील ने कोर्ट के सामने कहा कि कठुआ गैंगरेप पीड़िता की पहचान गलती से उजागर हो गयी.उन्होंने कहा कि कानून की सही समझ न होने के कारण उन्होंने कठुआ बलात्कार पीड़िता की पहचान उजागर कर दी.

हाईकोर्ट ने जम्मू – कश्मीर के कठुआ जिले में आठ वर्षीय बच्ची के साथ हुई बर्बरता और हत्या मामले में उसकी पहचान जाहिर करने वाले 12 मीडिया घरानों को 13 अप्रैल को नोटिस जारी किये थे. इन 12 मीडिया घरानों में से नौ के वकील आज अदालत में मौजूद थे. इससे पहले अदालत ने पीड़ित के बारे में ऐसी कोई भी जानकारी प्रकाशित – प्रसारित करने पर मीडिया पर रोक लगा दी थी जिससे उसकी पहचान उजागर होती हो. इनमें उसका नाम , पता , तस्वीर , पारिवारिक ब्यौरा , स्कूल संबंधी जानकारी , पड़ोस का ब्यौरा जैसी अन्य जानकारी शामिल है.

चीफ जस्टिस का कार्यभार संभाल रही जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस सी हरिशंकर ने आदेश दिया है कि मुआवजे की राशि एक सप्ताह के अंदर हाईकोर्ट के रजिस्टार जनरल के पास जमा की जाये और उसे जम्मू-कश्मीर के लीगल सर्विस अॅाथिरिटी के एकाउंट में जमा किया जाये, जिसका इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर के पीड़ितों के उत्थान के लिए किया जाये.
साथ ही कोर्ट ने रेप विक्टिम की पहचान को उजागर करने वालों के लिए कठोर शब्दों का प्रयोग किया और कहा कि जो भी ऐसा करता है उसे छह महीने की सजा हो सकती है. इस मामले में अगली सुनवाई 25 अप्रैल को होगी.

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