नेपाल की नीति भारत-चीन दोनों दोस्त के भारत के लिए क्या हैं मायने?

नयी दिल्ली : नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली फरवरी में अपने देश की कमान संभालने के बाद भारत के दौरे पर हैं. उनकी भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद कई अहम घोषणाएं हुईं, जिसमें एक अहम घोषणा भारत-नेपाल के बीच नयी दिल्ली से काठमांडू तकट्रेनचलाना है. यह […]

नयी दिल्ली : नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली फरवरी में अपने देश की कमान संभालने के बाद भारत के दौरे पर हैं. उनकी भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद कई अहम घोषणाएं हुईं, जिसमें एक अहम घोषणा भारत-नेपाल के बीच नयी दिल्ली से काठमांडू तकट्रेनचलाना है. यह पहल भारत के सामरिक हितों के लिए अहम है. नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने यहां अपने दौरे में कई अहम बयान भी दिये हैं. उन्होंने कहा है कि नेपाल ने भारत के संप्रभु हितों के खिलाफ कभी अपनी जमीन का इस्तेमाल नहीं करने दिया. उन्होंने यह भी कहा है कि ‘‘ सभी के साथ मित्रता और किसी के साथ दुश्मनी नहीं रखना ‘ नेपाल की विदेश नीति का सिद्धांत है. उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा है कि उनका देश दो बड़े देशों चीन और भारत के बीच स्थित है और वे दोनों से अच्छे संबंध चाहते हैं.

यानी यह बहुत स्पष्ट है कि नेपाल भारतकेलिए चीन से अपना नाता नहीं तोड़ेगा और चीन को खुश करने के लिए भारत से अपने ऐतिहासित रिश्तों परभी विराम नहीं लगाएगा. नेपाल की नीति दोनों ताकतवर व सामर्थ्यवान देशों से गहरे रिश्ते बनाने और उसके जरिये अपने देश का विकास करने की ही रहेगी.

उन्होंने अपने पहले कार्यकाल के दौरान फरवरी 2016 में भारत की यात्रा की थी. बीच के दिनों में मधेसी संकट के कारण नेपाल और भारत के संबंध बिगड़े थे. नेपाल में मधेसी वे लोग हैं, जिनके पूर्वज भारत के थे. नेपाल के एक संविधान संशोधन के जरिये इन्हें दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया गया था.

उसदौरान भारत ने नेपालकीजरूरतों के प्रति थोड़ीसुस्तीदिखा कर यह प्रदर्शित किया था कि वहभारतीय मूल के लोगों के साथ किये जा रहे व्यहार सेखुश नहीं है. उस दौरान वहां कई चीजों के दाम कई गुणा बढ़ गये थे. मधेसी संकट जब चरम पर था तब उसके कुछ दिनों बाद ही ओली भारत आये थे और यह संकट का समाधान निकालने की दिशा में प्रयास था.

अभी भारत दौरे पर आने से पहले भी ओली ने अपने देश में बयान दिया था कि वे भारत दौरे के दौरान नेपाल के गौरव के खिलाफ कोई समझौता नहीं करेंगे और राष्ट्र हित के खिलाफ कोई समझौता नहीं करेंगे. यानी नेपाल भारत से सहयोग पूर्ण मित्रता चाहता है और उसके लिए भारत उतना अधिक प्रासंगिक होगा जितनी इसकी आर्थिकव तकनीकी ताकत बढ़ेगी.

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