सरकार की आर्थिक नीति पर सवाल उठाने वाले यशवंत सिन्हा ने अब पीएम मोदी पर निशाना साधा
नयी दिल्ली : भाजपा के दिग्गज नेता और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे यशवंत सिन्हा तेवर अब भी कम नहीं हुआ है. वित्त मंत्री अरुण जेटली पर निशाना साधाने के बाद अब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी हमला बोला है. अंग्रेजी अखबार में गिरती जीडीपी और चरमरा रही अर्थव्यवस्था को लेकर सिन्हा […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
नयी दिल्ली : भाजपा के दिग्गज नेता और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे यशवंत सिन्हा तेवर अब भी कम नहीं हुआ है. वित्त मंत्री अरुण जेटली पर निशाना साधाने के बाद अब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी हमला बोला है.
अंग्रेजी अखबार में गिरती जीडीपी और चरमरा रही अर्थव्यवस्था को लेकर सिन्हा ने नोटबंदी के फैसले पर सरकार को आड़े हाथ लेते हुए अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में एक लेख लिखा था अब उन्होंने मीडिया के सामने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. उन्होंने कहा, डेढ़ साल से अर्थव्यवस्था में लगातार गिरावट आ रही है. इसके लिए पिछली सरकार को दोष नहीं दिया जा सकता है.
40 माह से सरकार पर बने रहने के बाद हम पिछली सरकार पर गिरती अर्थव्यवस्था का दोष नहीं मढ़ सकते हैं. यशवंत सिन्हा ने कहा, एक साल से समय मांग रहा हूं, लेकिन प्रधानमंत्री उनसे नहीं मिल रहे हैं. सिन्हा ने मोदी के साथ-साथ राजनाथ सिंह और पीयूष गोयल पर भी तंज कसा. उन्होंने राजनाथ सिंह और पीयूष गोयल की आर्थिक समझ पर सवाल उठाया.
गौरतलब हो कि यशवंत सिन्हा ने कहा था कि नोटबंदी ने गिरती जीडीपी में आग में तेल डालने की तरह काम किया है. पीएम मोदी कहते हैं कि उन्होंने गरीबी को काफी नजदीक से देखा है लेकिन ऐसा लगता है कि उनके वित्तमंत्री इस तरह का काम में लगे हैं कि वह सभी भारतीयों को गरीबी काफी करीब से दिखायेंगे.
उन्होंने कहा कि आज के समय में ना ही नौकरी मिल रही है और ना विकास तेज गति से हो पा रहा है. इनवेस्टमेंट घट रही है और जीडीपी भी घट रही है. जीएसटी को सही तरीके से लागू नहीं किया गया, जिसके कारण नौकरी और बिजनेस पर काफी असर पड़ा है. वित्त मंत्री अरुण जेटली पर तंज कसते हुए उन्होंने लेख में लिखा है कि इस सरकार में वह अभी तक सबसे बड़ा चेहरा रहे हैं. कैबिनेट का नाम तय होने से पहले ही यह तय था कि जेटली ही वित्त मंत्री का पदभार संभालेंगे. लोकसभा चुनाव में हारने के बाद भी उन्हें मंत्री बनने से कोई नहीं रोक सका.