नयी दिल्ली : गोरक्षा के नाम पर भीड़ द्वारा लोगों की पीट पीटकर हत्या किये जाने के मुद्दे पर आज विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार को घेरते हुए कहा कि देश में कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं है, साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से सवाल किया कि ऐसे कितने मामलों में उन्होंने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की. वहीं सत्तारुढ भाजपा ने देश के कुछ हिस्सों में हिन्दुओं को उनके सांस्कृतिक, धार्मिक कर्तव्यों में बाधा पहुंचाने और केरल में संघ प्रचारकों की हत्या को ‘भीड़ द्वारा पीट पीटकर हत्या’ की बड़ी घटना करार दिया और इस पर विपक्षी दलों की चुप्पी पर सवाल उठाया.
देश में ऐसी घटनाओं में वृद्धि होने का दावा करते हुए लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया, ‘ऐसी घटनाओं के पीछे केंद्र में सत्तारुढ भाजपा से जुड़े विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल जैसे संगठनों का हाथ है. प्रधानमंत्री बताएं कि वे इन हमलों को रोकने के लिए क्या करेंगे?’ उन्होंने कहा, ‘आज देश में ऐसा माहौल है कि हिंदू , हिंदू को मार रहा है और मुसलमान, मुसलमान को मार रहा है. और ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि भाजपा पूरे देश में अपना दर्शनशास्त्र लागू करना चाहती है.’
उन्होंने कहा कि संविधान में हर नागरिक को जीवन का अधिकार दिया गया है लेकिन देश में जब से राजग के कदम पड़े हैं तब से इस प्रकार की घटनाएं घट रही हैं और ये सब सरकार के समर्थन और प्रोत्साहन से हो रहा है. सदन में आज नियम 193 के तहत देश में अत्याचारों और भीड़ द्वारा हिंसा में जान से मारने की कथित घटनाओं से उत्पन्न स्थिति पर चर्चा की शुरुआत करते हुए खड़गे ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में ऐसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार लोगों को एक तरफ तो गुंडा करार दिया लेकिन आप बताएं कि आपने उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की, कितने एफआईआर दर्ज किये गये और कितने लोगों को जेल में भेजा गया.
उन्होंने कहा कि यदि ऐसी घटनाएं जारी रहीं तो क्या देश में लोकतंत्र बचेगा? एकता बचेगी? कानून व्यवस्था बचेगी? उन्होंने कहा कि पिछले 70 सालों में ऐसी घटनाएं नहीं हुईं. राजनीतिक मुद्दे पर हत्याएं होती हैं लेकिन देश में ऐसा पहली बार हो रहा है कि गोरक्षा के नाम पर लोगों को मारा जा रहा है. उन्होंने कहा, ‘लोग चिंतित हैं कि इस देश में लोकतंत्र है कि नहीं? सरकार है या नहीं? कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज है या नहीं?’
खड़गे ने कहा कि सरकार को इन सब बातों का जवाब देना चाहिए. भाजपा सांसद हुकुमदेव नारायण यादव ने देश के कुछ हिस्सों में हिन्दुओं के सांस्कृतिक, धार्मिक कर्तव्यों में बाधा पहुंचाने और केरल में संघ प्रचारकों की हत्या को ‘भीड़ द्वारा पीट पीटकर हत्या’ की बड़ी घटना करार दिया और इस पर विपक्षी दलों की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि सामाजिक समरसता के मंत्र को आगे बढ़ाते हुए मुसलमानों को हिन्दुओं एवं हिन्दुओं को मुसलमानों के विचारों का सम्मान करना चाहिए.
भाजपा सदस्य यादव ने कहा, ‘भीड़, भीड़ होती है…. चाहे किसी के नाम पर हो. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कई बार भीड़ द्वारा की गयी ऐसी घटनाओं को गलत बता चुके हैं. वे कह चुके हैं कि इन पर कार्रवाई होनी चाहिए. यह कार्य राज्यों को करना है और उन्हें कदम उठाना चाहिए.’ उन्होंने सवाल किया कि क्या संविधान में लिखा है कि राज्य में किसी विषय पर पलटन (फौज) भेज दो. कश्मीर में जरुरत है, चीन के साथ लगती सीमा पर जरुरत है…तब वहां फौज भेजी गयी है. हुकुमदेव नारायण यादव ने कहा कि सरकार कदम उठा रही है. आप (विपक्ष) नीतियों की आलोचना कर सकते हैं लेकिन हमारी नीयत पर सवाल नहीं उठा सकते.
रामायण काल के पौराणिक चरित्र और वेष बदल कर कार्य करने वाले राक्षस कालनेमी का जिक्र करते हुए भाजपा सांसद ने कहा कि कुछ लोग कालनेमी का रूप धरकर काम कर रहे हैं. आज भी कालनेमी मौजूद हैं और कल भी ये रहेंगे. कालनेमी एक विचारधारा है, चरित्र है. वो छद्म भेषी लोग है जो वेष बदलकर कालनेमी का रूप लेकर सरकार को बदनाम कर रहे हैं.
उन्होंने सवाल किया कि क्या कश्मीर में पत्थर फेंकने वाले और सेना के राष्ट्रीय कार्य में बाधा डालने वाले भीड़ का हिस्सा नहीं हैं. क्या देश के कुछ हिस्सों में हिन्दुओं के सांस्कृतिक, धार्मिक कर्तव्यों में बाधा पहुंचाने और केरल में संघ प्रचारकों की हत्या करने वाला समूह भीड़ नहीं है. लेकिन क्या किसी ने यह बात उठायी. केरल में प्रचारकों (संघ) की हत्या क्यों होती है? तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय ने देश में कथित गोरक्षा के नाम पर लोगों की पीट-पीटकर हत्या की घटनाओं का जिक्र करते हुए सरकार से एक मानव सुरक्षा कानून बनाये जाने की मांग की.
भाषण की शुरुआत करते हुए उन्होंने कहा कि यह चर्चा भाजपा बनाम विपक्ष या हिंदू बनाम मुस्लिम नहीं होनी चाहिए. सौगत राय ने एक पत्रिका के आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि देश में 2010 से 2017 तक गोरक्षा के नाम पर लोगों को मारे जाने की 63 घटनाएं घटीं, जिनमें 97 प्रतिशत घटनाएं 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद घटीं. राय ने पत्रिका के हवाले से कहा कि इन घटनाओं में 28 लोग मारे गये जिनमें से 24 मुसलमान थे.
उन्होंने कहा कि सरकार और भाजपा के लोग, ‘जिस तरह कांग्रेस मुक्त भारत की बात करते हैं, क्या उसी तरह मुस्लिम मुक्त भारत करने की बात तो नहीं है?’ राय ने अपनी बात जारी रखते हुए आरोप लगाया कि क्या ये मुसलमानों को निशाना बनाकर की जा रही हत्याएं तो नहीं हैं? राय की इस टिप्पणी पर भाजपा सांसदों ने विरोध दर्ज कराया. उधर केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरेन रीजीजू और संसदीय कार्य राज्यमंत्री एस एस अहलूवालिया ने राय द्वारा रखे गये आंकड़ों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उन्हें अपने आंकड़ों के स्रोत या जिस पत्रिका का वो हवाला दे रहे हैं, उसे सदन के पटल पर रखना चाहिए.
राय की एक टिप्पणी पर संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने भी कहा कि तृणमूल सदस्य अपुष्ट आरोप नहीं लगा सकते. तृणमूल सांसद राय ने कहा कि सरकार और भाजपा के लोग इस तरह की घटनाओं की निंदा करने में संकोच करते हैं, इसलिए राज्य इन पर नियंत्रण नहीं कर पाते. प्रधानमंत्री इस तरह की घटनाओं की निंदा तो करते हैं लेकिन लोगों को उनकी निंदा पर भरोसा नहीं क्योंकि जिस दिन उन्होंने बयान दिया, उसी दिन झारखंड में इस तरह की एक घटना सामने आयी.
केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने चर्चा में भाग लेते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष के पास भ्रष्टाचार और विकास जैसे मूलभूत मुद्दों पर बोलने के लिए कुछ नहीं है, इसलिए वह इस तरह के मुद्दे को उठा रहा है, जो विषय है ही नहीं. उन्होंने इस तरह की लिंचिंग की घटनाओं पर कार्रवाई के लिए राज्यों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि एक तरफ विपक्ष संघीय ढांचे की बात करता है और दूसरी तरफ सारी जिम्मेदारी केंद्र पर डाल देता है. दोनों चीजें साथ में नहीं चल सकतीं.
कथित गोरक्षा के नाम पर लोगों की हत्या की घटनाओं पर प्रधानमंत्री मोदी के बयान का जिक्र करते हुए पासवान ने कहा कि प्रधानमंत्री ने एक नहीं दो दो बार कहा है कि असामाजिक तत्व गोरक्षा के नाम पर हालात का फायदा उठाना चाहते हैं और राज्यों को ऐसे लोगों से कड़ाई से निपटना चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले सवा तीन साल की सरकार में एक भी बार बाबरी मस्जिद, राम मंदिर, अनुच्छेद 377 और समान नागरिक संहिता की बात नहीं की है और बार बार ‘विकास’ की ही बात करते हैं.
पासवान ने कहा कि आज सदन को इस तरह की घटनाओं के खिलाफ सर्वसम्मति से निंदा प्रस्ताव पारित करना चाहिए और सभी राजनीतिक दलों को सभी राज्यों से अपील करनी चाहिए कि इस तरह की कोई भी घटना होने पर 24 घंटे के अंदर कार्रवाई करें और दोषी व्यक्ति को जेल में डाला जाए. उस पर मुकदमा दर्ज कराया जाए. उन्होंने कांग्रेस को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि कांग्रेस अब ‘कब्र में जा रही है.’
