प्रतिनिधि, कुंडहित. शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन मां आदिशक्ति दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा हुई. जैसे-जैसे दिन गुजर रहे हैं, क्षेत्र में दुर्गापूजा को लेकर चहल-पहल बढ़ता जा रहा है. बंगाल सीमा से सटे कुंडहित प्रखंड में दुर्गापूजा बड़े ही शिद्दत और धूमधाम से की जाती है. प्रत्येक गांवों में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर चार दिवसीय पूजा-अर्चना की जाती है. अधिकांश गांवों में स्थायी दुर्गा मंदिर हैं, जहां प्रतिमा बनाकर हर साल भव्य पूजा होती है. पूजा को लेकर पंडालों को अंतिम रूप दिया जाने लगा है. वहीं मूर्तिकार भी प्रतिमाओं की सजावट व रंग-रोगन में जुट गये हैं. दुर्गापूजा के दौरान क्षेत्र में घर-घर पकवान बनाने की परंपरा रही है. इनमें चावल और गुड़ से बने आयसे एवं वेसन से लड्डू सबसे चर्चित मिष्ठान हैं. छोटे-बड़े सभी घरों में इसे तैयार कर रिश्तेदारों और परिचितों को भेंट किया जाता है. आधुनिकता के दौर में यह परंपरा कुछ हद तक धूमिल जरूर हुई है, फिर भी कुंडहित प्रखंड के बंगाली समुदाय आज भी पारंपरिक उमंग और भक्ति के साथ दुर्गापूजा में शामिल होते हैं.
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