धनेश्वर प्रसाद
कुजू: बोनस भुगतान को लेकर कुजू क्षेत्र के कोयला कर्मियों में इस बार दशहरा से पहले मायूसी छाई हुई है. जेबीसीसीआई-11 की स्टैंडर्डाइजेशन कमेटी की बैठक 22 सितंबर को बिना किसी निर्णय के अगले आदेश तक स्थगित कर दी गयी, जिससे बोनस भुगतान पर कोई स्पष्ट निर्देश नहीं मिल सका. इस वजह से प्रबंधन और ट्रेड यूनियनों के बीच बोनस को लेकर कोई ठोस चर्चा नहीं हो पायी. कोयला कर्मियों को उम्मीद थी कि बैठक में बोनस भुगतान का आदेश जारी होगा और पूजा से पहले उनके बैंक खातों में राशि चली जायेगी.
अनिश्चितता की है स्थितिपिछले वर्ष 2024 में कोयला कर्मियों को 93,750 पीएलआर बोनस के रूप में मिला था. इस बार भी उन्हें उम्मीद थी कि दशहरा से पहले बोनस मिलेगा, लेकिन बैठक स्थगित होने के कारण स्थिति अनिश्चित बनी हुई है. अब दशहरा से पहले केवल तीन कार्य दिवस (25, 26 और 29 सितंबर) शेष हैं. 27 सितंबर को चौथा शनिवार और 28 सितंबर को रविवार होने के कारण अवकाश रहेगा. इसके बाद 30 सितंबर से 2 अक्तूबर तक अष्टमी, नवमी, विजयदशमी और गांधी जयंती की छुट्टियां हैं.
अग्रिम बोनस भुगतान की मांग कीइस बीच यूनाइटेड कोल वर्कर्स यूनियन के बैनर तले कुजू क्षेत्र के कोयला कर्मियों ने महाप्रबंधक कार्यालय के समक्ष पीट मीटिंग कर अग्रिम एक लाख बोनस भुगतान की मांग की. यूनियन नेताओं का कहना है कि यदि दशहरा से पहले बोनस नहीं मिला, तो पूजा के बाद सितंबर माह की सैलरी और क्वार्टरली बोनस का भुगतान किया जा सकता है. कई कर्मियों को उम्मीद है कि प्रबंधन पूजा से पहले उन्हें सैलरी या बोनस की राशि अग्रिम रूप से दे सकता है.
कारोबार हो सकता है प्रभावितबोनस भुगतान में देरी का असर पूजा बाजार पर भी साफ दिख रहा है. रामगढ़ जिले के बाजारों में कपड़ा, फुटवियर, ग्रोसरी, ज्वेलरी, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक सामान, श्रृंगार सामग्री, एलईडी, एसी, फ्रिज, कार और बाइक की दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही बढ़ने लगी थी. कारोबारियों को उम्मीद थी कि बोनस भुगतान के बाद बिक्री में और तेजी आयेगी, लेकिन इस बार असमंजस की स्थिति के कारण बाजार की रौनक फीकी पड़ने लगी है. अनुमान है कि सिर्फ रामगढ़ जिले में ही 130 करोड़ का कारोबार प्रभावित हो सकता है.
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