– नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने देवकांत की याचिका की सुनवाई के दौरान दिया आदेश कटिहार शहर में वायु प्रदूषण को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण में औरंगाबाद के देवकांत कुमार की एक याचिका सुनवाई करते हुए साकारात्मक पहल करने का आदेश दिया है. उल्लेखनीय है कि देवकांत कुमार ने अपनी याचिका ईमेल द्वारा इस न्यायाधिकरण को भेजी थी. याचिका में कहा गया है कि कटिहार रेलवे प्रशासन और कटिहार नगर निगम की ओर से वायु प्रदूषण किया जा रहा है. स्थानीय निवासियों द्वारा कई बार केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, डीआरएम, नगर निगम कटिहार से शिकायत की गयी. पर कोई सुनवाई नहीं हुई. जबकि रेलवे व नगर निगम ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के प्रावधानों और भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सम्मानपूर्वक जीने के अधिकार का उल्लंघन कर रहे है. याचिकाकर्ता ने अपर मुख्य सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग एवं नगर विकास एवं आवास विभाग, जिला मजिस्ट्रेट सह कलेक्टर कटिहार, नगर निगम, कटिहार एवं पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के मंडल रेलवे प्रबंधक कटिहार को परिवादी बनाया है. राष्ट्रीय हरित अधिकरण की ओर से न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी, न्यायिक सदस्य एवं डॉ प्रशांत गर्गव, विशेषज्ञ सदस्य की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि सभी पांचों पक्षकार दो महीने के भीतर अपना उत्तर व प्रतिक्रिया दाखिल करेंगे. साथ ही यह भी आदेश दिया गया है कि तथ्यात्मक स्थिति की पुष्टि करने और उचित सुधारात्मक कार्रवाई करने के लिए एक संयुक्त समिति का गठन किया जायेगा. आदेश के अनुसार अधिकरण की ओर से इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट सह कलेक्टर, कटिहार और बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एक संयुक्त समिति का गठन की है और यह समिति दो सप्ताह के भीतर बैठक करने, साइट का दौरा करने, आवेदक की शिकायतों पर विचार करने, आवेदक और संबंधित परियोजना प्रस्तावकों के प्रतिनिधियों को शामिल करने, तथ्यात्मक स्थिति की पुष्टि करने और विधि सम्मत प्रक्रिया का पालन करते हुए उचित उपचारात्मक कार्रवाई करेंगे. आदेश में कहा गया है कि बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समन्वय और अनुपालन के लिए नोडल एजेंसी होगी. मामले की अगली सुनवाई के लिए दिनांक 10-11-2025 को सूचीबद्ध किया गया है.
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