Darbhanga News: दरभंगा. लनामिवि के पीजी इतिहास विभाग में बुधवार को हिस्टोरियोग्राफी पर व्याख्यान विभागाध्यक्ष प्रो. संजय झा की अध्यक्षता में हुआ. इसमें पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के प्रो. अविनाश कुमार झा ने कहा कि इतिहास केवल घटनाओं का विवरण नहीं, बल्कि तथ्यों और साक्ष्यों पर आधारित एक जीवंत प्रक्रिया है इतिहास लेखन की प्रक्रिया में तीन तथ्य अनिवार्य है. इनमें इतिहास की परिभाषा की स्पष्टता, इतिहास लेखन की पद्धति की समझ एवं साक्ष्यों के चयन व मूल्यांकन की क्षमता शामिल है. कहा कि सच्चा इतिहासकार वही है, जो स्थानीय स्तर पर जाकर प्रमाण जुटाये एवं उसका निष्पक्ष विश्लेषण कर निष्कर्ष प्रस्तुत करे. अनुमान और पक्षपात पर लिखा गया इतिहास कभी भी टिकाउ नहीं हो सकता. इएच कार, जेबी ब्यूरी और रांके जैसे विद्वानों की परिभाषाओं का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि अलग-अलग दृष्टिकोणों के बावजूद सभी ने इतिहास को सत्य और प्रमाण पर आधारित माना है.
शोधार्थी के लिए धैर्य, अनुशासन और साक्ष्यों का गहन अध्ययन सबसे बड़ी पूंजी
छात्रों से कहा कि एक शोधार्थी के लिए धैर्य, अनुशासन और साक्ष्यों का गहन अध्ययन सबसे बड़ी पूंजी है. विभागाध्यक्ष प्रो. संजय झा ने कहा कि इतिहास; अतीत, वर्तमान और भविष्य के संबंध, परिवर्तन का अध्ययन और विविध विचारों को स्थापित कर समग्र मानव क्रिया-कलापों को प्रदर्शित करता है. संचालन डॉ मनीष कुमार और धन्यवाद ज्ञापन डॉ ज्योति प्रभा ने किया. मौके पर प्रो. नैयर आजम, डॉ अमीर अली खान, डॉ अमिताभ कुमार, डॉ मनीष कुमार, डॉ शकील अख्तर, डॉ संदीप कुमार आदि मौजूद थे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
