बायां करवट सोने के फायदे

विशेषज्ञों के अनुसार हमारे खान-पान के साथ-साथ हमारे वातावरण और विचार भी हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं, बल्कि नींद के दौरान हमारी बॉडी का पॉश्चर भी हमारे अंगों के साथ हमारे मस्तिष्क को काफी गहराई से प्रभावित करता है. जानिए कैसे? पूरी रात एक ओर करवट लेकर सोना संभव नहीं. नींद में हम कई […]

विशेषज्ञों के अनुसार हमारे खान-पान के साथ-साथ हमारे वातावरण और विचार भी हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं, बल्कि नींद के दौरान हमारी बॉडी का पॉश्चर भी हमारे अंगों के साथ हमारे मस्तिष्क को काफी गहराई से प्रभावित करता है. जानिए कैसे?

पूरी रात एक ओर करवट लेकर सोना संभव नहीं. नींद में हम कई बार करवटें बदलते हैं. इसी वजह से सुबह आंख खुलने पर पता चलता है कि हम रात में सोये थे पूर्व दिशा की ओर सिर करके और जागते हैं पश्चिम दिशा की तरफ. नींद में हमें खुद भी पता नहीं होता कि हम किस पोज़ीशन में सो रहे हैं. जिस ओर हमारा बॉडी रिलैक्स फील करता है, हम उसी ओर पोजीशन लेकर पूरी रात सोये रहते हैं.

पेट की बीमारियों से निजात

बायीं ओर करवट लेकर सोना कई तरह से स्वास्थ्य की दृष्टि से फायदेमंद हैं. बायीं ओर करवट लेकर सोने से पेट की कई बीमारियां आने से पहले ही समाप्त हो जाती हैं. जैसे- पेट फूलना, पेट में गैस बनना, बदहजमी होना, आदि जैसी सारी परेशानियां बायीं ओर करवट लेकर सोने से हल हो जाती हैं. डॉक्टरों के मुताबिक, बायीं ओर करवट लेकर सोने से शरीर में जमा होने वाले टॉक्सिन धीरे-धीरे लसिका तंत्र द्वारा निकल जाते हैं. दरअसल, बायीं ओर सोने से हमारे लीवर पर किसी प्रकार का कोई दबाव नहीं पड़ता, अत: यह टॉक्सिन आसानी से शरीर से निकल जाते हैं.

पाचन तंत्र होता है मजबूत

बायीं ओर करवट लेकर सोने से पाचन तंत्र को लाभ मिलता है. पेट और पैंक्रियाज पर भी कम प्रेशर पड़ता है. पैंक्रियाज से एंजाइम सही समय पर निकलना शुरू होता है. इससे खाया गया भोजन आराम से पेट से होते हुए नीचे पहुंच पाता है और आसानी से हजम होता है.

पेट रहता है साफ

बायीं ओर सोने से ग्रैविटी के कारण भोजन छोटी आंत से बड़ी आंत तक आराम से पहुंचता है. अत: जब पाचन तंत्र की मुश्किलें दूर होगीं, तो सुबह पेट भी आसानी से साफ हो जायेगा.

दिल की बीमारियों से बचाव

बायीं करवट सोने का फायदा दिल को भी मिलता है. इस पोजीशन में सोने से हार्ट पर प्रेशर कम पड़ता है. हार्ट में ब्लड सप्लाई अच्छी तरह से हो पाती है. इससे किडनी को काम करने में भी मदद मिलती है, जिसके कारण हाथों, पैरों, एड़ी आदि में सूजन की संभावना कम रहती है. हार्ट में सही मात्रा में रक्त का संचार होने से गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है.

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