चीनी यानी ‘ब्रेस्ट कैंसर’

हर ख़ुशी की बात पर हम मुंह मीठा करने की बात कहते हैं और इसी तरह से न जाने कितना मीठा खा जाते हैं. हर तीज-त्यौहार पर जब तक मीठा न हो तब तक कोई भी फेस्टिवल पूरा नहीं होता लेकिन क्या आप जानते हैं? महिलाएं, जो मीठा खान पसंद करती हैं उन्हें मीठे की […]

हर ख़ुशी की बात पर हम मुंह मीठा करने की बात कहते हैं और इसी तरह से न जाने कितना मीठा खा जाते हैं. हर तीज-त्यौहार पर जब तक मीठा न हो तब तक कोई भी फेस्टिवल पूरा नहीं होता लेकिन क्या आप जानते हैं? महिलाएं, जो मीठा खान पसंद करती हैं उन्हें मीठे की वजह से ‘ब्रेस्ट कैंसर’ होने का खतरा अधिक होता है!

जी हां, खास कर महिलाओं को मीठा खाना उन्हें ब्रेस्ट कैंसर दे सकता है.

ताजा शोध के मुताबिक, यादा चीनी का इस्तेमाल स्तन कैंसर और फेफड़ों की परेशानी का कारण बन सकता है.

शोधकर्ता पीयिंग यांग ने बताया कि चूहों में अधिक सुक्रोज यानी चीनी के इस्तेमाल से स्तन कैंसर की गांठों में तेज वृद्धि देखने को मिली.

शोधकर्ताओं ने पाया कि घरेलू चीनी में पाया जाने वाला फ्रक्टोस फेफड़े की परेशानी और स्तन कैंसर का कारण बनता है.

पश्चिमी देशों के भोजन में घरेलू चीनी का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर विभिन्न खाद्य पदार्थो में होता है. अमेरिका में प्रति व्यक्ति सालाना 100 पाउंड से ज्यादा चीनी की खपत होती है. मीठे पेय पदार्थो ने चीनी की अत्यधिक खपत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

शोधकर्ताओं ने कहा कि चीनी आज जीवनशैली का अहम हिस्सा बन गई है, ऐसे में शोध के नतीजे चिंताजनक हैं.

विशेषज्ञों की माने तो चीनी की जगह शहद का इस्तेमाल करने से महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर होने की संभावनाओं से बचाया जा सकता है.

यह शोध कैंसर रिसर्च जर्नल में प्रकाशित किया गया है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Tags

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >