‘एंटीबायोटिक दवाएं’ हो सकती हैं जानलेवा!

एंटीबायोटिक दवाओं का ‘बिना परामर्श’ लेते रहना आपके स्वास्थ्य के लिए घातक हो सकता है. जी हाँ, यह बात हम नहीं बल्कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक अध्ययन में भारत की स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी एक रिपोर्ट ने कही है. जानने के लिए पढ़े… भारत के 50% से ज्यादा लोग बिना दवाओं को जांचे-परखे खाते […]

एंटीबायोटिक दवाओं का ‘बिना परामर्श’ लेते रहना आपके स्वास्थ्य के लिए घातक हो सकता है. जी हाँ, यह बात हम नहीं बल्कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक अध्ययन में भारत की स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी एक रिपोर्ट ने कही है. जानने के लिए पढ़े…

भारत के 50% से ज्यादा लोग बिना दवाओं को जांचे-परखे खाते रहते हैं. जो उनके स्वास्थ्य पर हानिकारक रूप से असर डालता है. इन्ही दवाओं में सबसे ज्यादा एंटीबायोटिक दवाएं खाई जा रही हैं. इस लापरवाही का सबसे बड़ा कारण है लोगों का ‘दवाओं के प्रति अन्धविश्वास’ का होना.

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक एंटीबायोटिक दवाओं के बेअसर होने की वजह से दुनिया में प्रतिवर्ष सात लाख लोग मारे जाते हैं. भारत में वर्ष 2010 में टीबी के 4 लाख 40 हजार नये मामले सामने आये, जिन पर एंटीबायोटिक का कोई प्रभाव नहीं देखा गया। इनमें से लगभग डेढ़ लोगों की मौत हो गई.

माना जा रहा है कि यदि एंटीबायोटिक दवाओं के कम होते असर को नहीं रोका जा सका तो वर्ष 2050 तक मरने वालों की संख्या बढ़कर 1 करोड़ प्रतिवर्ष हो जाएगी. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक हर भारतीय साल में औसतन 11 एंटीबायोटिक दवा खाता है.

इस बात को पुख्ता करने के लिए गंगाराम अस्पताल में नवंबर 2014 से दिसंबर 2015 के बीच आईसीयू में भर्ती 234 मरीज़ों पर अध्ययन किया गया, जिसके नतीजों के मुताबिक 70% मरीज़ों पर एंटीबायोटिक दवाओं ने असर नहीं किया.

हालाकि बिना आवश्यकता एंटिबायोटिक दवा लेने से रोकने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2011 में एंटीबायोटिक पॉलिसी बनाई थी लेकिन इसका कोई असर देखने को नहीं मिला.

जानिए यह भी…

-बिना एंटीबायोटिक दवाओं की जरूरत के भी यदि इन्हें खाया जाता है तो मरीज का इलाज करना लगभग नामुमकिन हो जाता है. खासतौर पर टीबी की बीमारी में इलाज असंभव हो जाता है.

90 फीसदी डॉक्टर मरीज को दवा देने के तीन दिन बाद नियमानुसार शरीर पर उस दवा के प्रभाव की जांच नहीं करते.

एम्स के फार्मोकोलॉजी डिपार्टमेंट ने नवंबर 2014 से लेकर दिसंबर 2015 के बीच एनसीआर के 500 डेंटिस्ट का सर्वे किया, जिसमें पता चला 74% डॉक्टर शरीर में बैक्टीरिया की जांच करवाए बिना ही एंटीबायोटिक दवाएं दे रहे हैं.

सर्दी-जुकाम, फ्लू, खांसी, गले की सूजन पेट-दर्द, कान का इन्फेक्शन आदि में एंटीबायोटिक नहीं लेना जरुरी नहीं होता, बल्कि लेना ही नही चाहिए.

साइनस इन्फेक्शन, मूत्रनली में संक्रमण, त्वचा संक्रमण, चोट लगने पर आप डॉक्टर से सलाह लेकर आवश्यकता के अनुसार एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन कर सकते हैं.

जरूरत से ज़्यादा और अनियमित रूप से एंटीबायोटिक दवा खाने से दवा के बेअसर होने के अलावा डायरिया, मुंह में संक्रमण और पाचन तंत्र में कमजोरी होने का खतरा भी बढ़ जाता है.

गर्भवती महिलाओं, एलर्जी और लीवर की बीमारी से पीड़ित लोगों को खासतौर पर बिना डॉक्टर से सलाह लिए एंटीबायोटिक दवा कभी नहीं लेनी चाहिए.

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