प्रेगनेंसी की दवाएं भी हो सकती हैं कैंसर का कारण...

बढ़ती उम्र, देर से शादी होने के कारण प्रेगनेंसी में मुश्किलें आना अब आम बात हो चली है, ऐसे में दवाइयों पर निर्भर होना और डॉक्टर्स का सहारा लेना ही अंतिम विकल्प नजर आता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही विकल्प आपके होने वाले बच्चे को कैंसर के मुंह में ले जा सकते […]

बढ़ती उम्र, देर से शादी होने के कारण प्रेगनेंसी में मुश्किलें आना अब आम बात हो चली है, ऐसे में दवाइयों पर निर्भर होना और डॉक्टर्स का सहारा लेना ही अंतिम विकल्प नजर आता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही विकल्प आपके होने वाले बच्चे को कैंसर के मुंह में ले जा सकते हैं?

चौंकिए नहीं, ये बात एक शोध के अंतर्गत सामने आई है. गर्भधारण के लिए दवाओं का इस्तेमाल करना आपके और आपके बच्चे के लिए हानिकारक हो सकता है, यही नहीं इन दवाइयों से आपके बच्चे को ब्लड कैंसर होने कि संभावना रहती है.

एक रिसर्च के अनुसार, जो महिलाएं गर्भधारण करने के लिए प्रजनन संबंधी दवाएं लेती हैं उनके होने वाले बच्चे को ल्यूकेमिया (एक प्रकार का रक्त कैंसर) होने का खतरा रहता है.

फ्रांस में हुए इस शोध में पाया गया है कि जो महिलाएं रोजाना अंडाशय उत्तेजक दवाएं यानी गर्भवती होने के लिए दवाओं का सेवन करती हैं उनके बच्चों को एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया (एएलएल)होने का खतरा सामान्य बच्चों के मुकाबले 2.6 गुना ज्यादा होता है. एएलएल बच्चों में होने वाला सबसे सामान्य ल्यूकेमिया है.

इन दवाओं के सेवन से बच्चों में एक दुर्लभ ल्यूकेमिया एक्यूट मेलोयड ल्यूकेमिया (एएमएल)होने का खतरा भी 2.3 गुना बढ़ जाता है.

शोधकर्ताओं का कहना है कि आईवीएफ प्रक्रिया से पैदा होने वाले बच्चों में ल्यूकेमिया होने का कोई खतरा नहीं होता है.

इन व्रिटो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) एक तकनीक है, जिसमें महिलाओं में कृत्रिम गर्भाधान किया जाता है. इस प्रक्रिया में कैंसर होने कि संभावनाएं नहीं होती इसलिए डॉक्टर्स इसे अधिक सुरक्षित मानते हैं.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >