इंग्लैंड : दायित्वों को निबटा कर पाती हैं ज्यादा संतोष
इंग्लैंड में हुए एक सर्वे में यह पता चला है कि 85 वर्ष से ज्यादा उम्र की महिलाएं पुरुषों की अपेक्षा ज्यादा खुश रहती हैं. नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस)ने इस सर्वे में आठ हजार लोगों को शामिल किया.
शोधकर्ताओं ने पाया कि महिलाएं पुरुषों की अपेक्षा अपनी शारीरिक परेशानी छुपा लेती हैं, जबकि पुरुष इसका बखान करते हैं. शोध में पता चला कि 16 से 24 साल की 28 प्रतिशत महिलाएं मानसिक परेशानी झेल रहीं हैं. वही इस उम्र के 16 प्रतिशत पुरुषों में मानसिक परेशानी देखी गयी. शोध में यह पता चला कि 16 से 24 वर्ष की 28 प्रतिशत पुरुष व महिलाएं मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं. जैसे ही महिलाओं की उम्र बढ़ने लगती है उनकी खुशियां कम होने लगती है.
रिपोर्ट के अनुसार 45 से 54 वर्ष की महिलाओं में 24 प्रतिशत मानसिक अस्वस्थ पायी गयीं. इस सर्वे में शामिल लोगों को 12 प्रश्नों की एक तालिका दी गयी थी. जिसमें सेल्फ कॉन्फिडेंस, अवसाद व अनिद्रा से संबंधित प्रश्न थे. सर्वे में शामिल लोगों की जांच के लिए एक पैमाना तय किया गया था. इसमें 12 प्वाइंट लगाये गये थे. जिन लोगों को चार प्वाइंट मिले वे मानसिक रूप से अस्वस्थ माने गये. रॉयल कॉलेज ऑफ साइकोटिस्ट्स के डीन केट लोवेट के मुताबिक, पुरुषों की तुलना में महिलाएं आम तौर पर ज्यादा दुखी रहती हैं क्योंकि उनकी घरेलू जिम्मेदारियां ज्यादा होती हैं.
उनमें उलझे रहने से उनके दिमाग को ज्यादा आराम नहीं मिलता. या वे खुशी के क्षणों को ज्यादा देर तक इंज्वाय नहीं कर पाती और फिर उन्हें जीवन बोझ लगने लगता है. जैसे ही महिलाओं की उम्र बढ़ती जाती है और बच्चे बड़े हो जाते हैं. वे अपने कामों में व्यस्त हो जाते हैं, इसके बाद इन महिलाओं की ड्यूटी समाप्त हो जाती है और वे ज्यादा खुश रहती हैं. हालांकि, जब महिलाओं में जब अवसाद ज्यादा विकसित हो जाता है तो वे खुश नहीं रह पातीं. 85 की उम्र पार कर चुकी बिना पुरुष साथी की महिलाओं को ज्यादा खुश देखा गया है.
कैसे होती हैं महिलाएं मानसिक बीमारी का शिकार
मानसिक बीमारी एक ऐसी बीमारी है जिससे विचार व व्यवहार में गंभीर गड़बड़ी हो जाती है. इससे जीवन की सामान्य कार्यों व दिनचर्या से निबटने से व्यक्ति असमर्थ हो जाता है.
मानसिक बीमारी के 200 से अधिक रूप हैं.उपेक्षा की शिकार महिलाओं में यह बीमारी आम होती है. सामान्य विकारों में से कुछ अवसाद, कॉमन डिस्ऑडर, मनोभ्रंश, सिजोफ्रेनिया और चिंता इसके सामान्य रूप हैं. इससे ग्रसित महिला के लक्षणों में मनोदशा, व्यक्तित्व, व्यक्तिगत आदतों या सामाजिक परिवेश में परिवर्तन देखा जा सकता है.
