मां ओशो प्रिया
संस्थापक, ओशोधारा
सोनीपत
कमर दर्द का सीधा संबंध रीढ़ की हड्डी से होता है. यह परेशानी व्यायाम के अभाव के कारण कमर की रीढ़ की मांसपेशियों और लिगामेंट के कमजोर हो जाने, कमर में झटका लगने, गलत तरीके से झुकने या उठने, कमर सीधी करके तथा दोनों नितंबो पर समान भार देकर न बैठने के कारण रीढ़ की संरचना बिगड़ने से पैदा होती है.
जिन लोगों को काम की वजह से बार-बार उठना-बैठना या भारी सामान उठाना पड़ता है, उन्हें कमर दर्द की शिकायत अधिक होती है. हालांकि, कंप्यूटर पर लंबे समय तक बैठने के कारण अब यह समस्या नौजवानों में भी बढ़ने लगी है. कमर दर्द की अनदेखी की जाये, तो धीरे-धीरे कूल्हे और पैरों में भी दर्द की समस्या शुरू हो जाती है, जिससे चलना-फिरना मुश्किल हो जाता है. अत: इस दर्द से बचने के लिए कुछ व्यायाम करना जरूरी है. साथ ही खान-पान पर भी ध्यान देने की जरूरत होती है.
कैसे करें : पीठ के बल लेटकर टांगों को घुटनों से मोड़कर घुटनों से पैरों तक के भाग को कुर्सी व पलंग पर सीधा करके रखें ताकि घुटनों से जंघाओं की स्थिति बिल्कुल 90 डिग्री पर हो.
अब अंगूठा, मध्यमा व छोटी उंगली के अग्रभाग को मिलाएं तथा तर्जनी व अनामिका को सीधा रखें. ऐसा केवल दाएं हाथ से करें. बाएं हाथ के अंगूठे के बीचवाले मोड़ को तर्जनी उंगली के नाखून पर रखें.
कितनी देर : धीमी-लम्बी-गहरी श्वास के साथ 20-20 मिनट दिन में दो बार
संपर्क : ओशोधारा, सोनीपत, मो-09891532889
