स्वाइन फ्लू में ECMO से लाभ....जानें इसके बारे में

एच1 एन1 वायरस की वजह से यदि लंग्स को ज्यादा क्षति पहुंची हो, तो एक्स्ट्राकॉर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनेशन (ECMO) की मदद से इसका इलाज संभव है. देश में पहली बार स्वाइन फ्लू के मरीजों में एक्मो मशीन का इस्तेमाल किया गया और यह सफल रहा. दिल्ली के फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट के क्रिटिकल केयर डिपार्टमेंट के […]

एच1 एन1 वायरस की वजह से यदि लंग्स को ज्यादा क्षति पहुंची हो, तो एक्स्ट्राकॉर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनेशन (ECMO) की मदद से इसका इलाज संभव है. देश में पहली बार स्वाइन फ्लू के मरीजों में एक्मो मशीन का इस्तेमाल किया गया और यह सफल रहा.
दिल्ली के फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट के क्रिटिकल केयर डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डॉ संदीप दीवान के अनुसार 27 साल की याशी को बुखार की वजह से फोर्टिस शालीमारबाग में लाया गया. जांच में उनमें एच1एन1 की पुष्टि हुई थी. उनकी स्थिति खराब होने लगी, यहां तक कि वेंटिलेटर सपोर्ट के बाद भी उनकी स्थिति में सुधार नहीं हो पाया.
उस सेंटर में एक्मो की सुविधा नहीं थी और उन्हें शिफ्ट करना भी मुश्किल था. इसलिए एक्मो मशीन ले जाकर उन्हें इस पर लिया गया और उसके बाद उन्हें ओखला स्थित सेंटर में शिफ्ट किया गया. करीब 10 दिन वह इस मशीन पर रहीं और अब बिल्कुल ठीक हैं. डॉक्टरों का कहना है कि यदि रिकवर करने की उम्मीद बची हो, तो यह मशीन काफी कारगर साबित होती है.
ECMO का इस्तेमाल हार्ट और लंग्स के खराब होने पर किया जाता है, लेकिन पहली बार स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए इस्तेमाल किया गया है और यह सफल साबित हुआ है. इसमें मशीन द्वारा मरीज के शरीर से खून और कार्बनडायॉक्साइड निकाल कर ऑक्सीजन पंप कर दिया जाता है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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