पोषक तत्वों से भरपूर डायट लें बुजुर्ग, नही तो होगी ये परेशानी

उम्र के अंतिम पड़ाव पर बुजुर्गों को शारीरिक और मानसिक रूप से कई समस्याओं से दो-चार होना पड़ता है. उम्र बढ़ने के साथ शरीर का मेटाबाॅलिज्म रेट धीमा हो जाता है, जिससे शरीर में रिलीज होनेवाले एन्जाइम्स और हार्मोंस कम होने लगते हैं. इससे पाचन और रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है. भूख कम […]

उम्र के अंतिम पड़ाव पर बुजुर्गों को शारीरिक और मानसिक रूप से कई समस्याओं से दो-चार होना पड़ता है. उम्र बढ़ने के साथ शरीर का मेटाबाॅलिज्म रेट धीमा हो जाता है, जिससे शरीर में रिलीज होनेवाले एन्जाइम्स और हार्मोंस कम होने लगते हैं. इससे पाचन और रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है. भूख कम लगती है.
पोषक तत्वों की कमी के कारण मसल्स कमजोर हो जाते हैं. कैल्शियम और विटामिन-डी की कमी के कारण हड्डियां कमजोर हो जाती हैं. मेटाबाॅलिज्म रेट धीमा होने से कैलाेरी खर्च नहीं होता और कोलेस्ट्राॅल लेवल बढ़ जाता है.
इससे मोटापा, बीपी, डायबिटीज, आॅस्टियोपोरोसिस, आर्थराइटिस जैसी बीमारियों से जूझना पड़ता है.इससे निबटने के लिए रोजाना पोषक तत्वों से भरपूर बैलेंस्ड डायट लेना जरूरी है. फिट रहने के लिए नियमित रूप से एक्सरसाइज भी जरूरी है. इससे शरीर एक्टिव रहेगा व शरीर का मेटाबाॅलिज्म सुचारू रूप से चलेगा. रोजाना 30-45 मिनट की तेज चाल, योगासन या हल्की एक्सरसाइज जरूरी है.
डायट में रखें इन बातों का ख्याल
प्रतिदिन 3 लीटर पानी जरूर पीएं. डिहाइड्रेशन नहीं होगा, तो पाचन क्रिया भी ठीक रहेगी. कब्ज, पेट में ऐंठन, त्वचा का रूखापन और उससे होनेवाली खुजली दूर रहेगी. उम्र बढ़ने से पाचन क्रिया धीमी हो जाती है.
इसलिए बुजुर्गों को तला-भुना, अधिक मसालेवाला गरिष्ठ भोजन नहीं करना चाहिए. पराठे, पकौड़े और पूरी-कचौड़ियों के बजाय रोस्टेड, ग्रिल्ड चीजें खाएं. देसी घी का उपयोग न करें. इसमें फैट की मात्रा अधिक होती है.
कम फिजिकल एक्टिविटी के कारण यह पचता भी नहीं है और धमनियों में जम जाता है, जिससे बैड कोलेस्ट्राॅल, ब्रेन स्ट्रोक और हार्ट अटैक होने की संभावना बढ़ जाती है.
इसके बदले सीड्स आॅयल का उपयोग करें, जैसे- आॅलिव, कनौवा, सोयाबीन, सनफ्लाॅवर, बादाम का तेल आदि. इनमें ओमेगा-3 और 6 फैटी एसिड है, जो शरीर के लिए लाभदायक होता है. फैट कम होने के बावजूद ये तेल रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं और बाॅडी को लचीला और मजबूत बनाते हैं. ओमेगा-3 के नियमित सेवन से ब्लड में फैट का स्तर नियंत्रित रहता है. इससे जोड़ों में दर्द, पीठ दर्द, गठिया, जकड़न आदि में आराम मिलता है.
प्रोटीन : आहार में प्रोटीन जरूर शामिल करें. यह टूटे सेल्स की रिपेयरिंग कर मांसपेशियों को मजबूत करता है. शाकाहारी लोग दिन में दो कटोरी दाल या अंकुरित दाल की चाट, एक कटोरी पनीर या सप्ताह में 3-4 बार टोफू ले सकते हैं.
रात में साबूत दाल न लें, यह अधिक उम्र में पचने में मुश्किल होता है. राजमा, चना या चने की दाल बना रही हैं, तो इसके रसे में आधी कटोरी दही या घिया का रस मिला लें. इससे न्यूट्रीशियस वैल्यू और टेस्ट दोनों बढ़ जायेगा. यह आसानी पच भी जाता है. मांसाहारी भोजन करनेवाले बुजुर्ग ब्रेकफास्ट में रोज उबला या पोच अंडा ले सकते हैं.
बातचीत: रजनी अरोड़ा
फिट रहने के लिए मिनरल्स हैं जरूरी
फिट रहने के लिए जरूरी है विटामिंस और मिनरल्स का सेवन. इसके लिए हरी सब्जियां और फलों का सेवन जरूरी है. इनमें मौजूद एंटीआॅक्सीडेंट्स फ्री रैडिकल्स से रक्षा करते हैं.
शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने और रोगों से लड़ने में भी ये कारगर साबित होते हैं. 2-3 कटोरी सब्जियां आहार में शामिल करनी चाहिए. लंच-डिनर के अलावा नाश्ते में पोहा, उपमा, इडली, दलिया, भेलपुरी आदि में भी सब्जियों जैसे- बींस, गाजर आदि का उपयोग कर सकते हैं.
डायबेटिक मरीज केला, आम, चीकू जैसे फलों से परहेज रखें. ब्लड प्रेशर के मरीज रसदार फलों का सेवन अधिक करें. एनीमिया या मेनोपाॅज की स्टेज पर पहुंची महिलाएं, अनार, सेब, कीवी जैसे आयरन की अधिकतावाले फलों का सेवन करें. गठिया रोगी ठंडी तासीरवाली चीजों का परहेज करें.
पपीता, चीकू जैसे फल फायदेमंद होंगे. मिनरल्स की आपूर्ति के लिए 5 बादाम, एक अखरोट और एक अंजीर रात को भिगो दें और सुबह खाली पेट इनका सेवन करें. एनीमिया या मेनोपाॅज की स्टेज पर पहुंची महिलाएं इसके साथ ही 5 किशमिश भी ले सकती हैं.

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