women’s day 2020 : Generation Equality के लिए यह है थीम…

दुनिया की आधी आबादी को समर्पित है अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस. इस दिवस को मनाने का उद्देश्य यह है कि महिलाओं को उनका अधिकार और सम्मान मिले, ताकि लैंगिक आधार पर कोई भेद समाज में ना रहे. संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस वर्ष महिला दिवस के लिए जो थीम तय किया है वह है “I am Generation Equality: Realizing Women’s Rights”.

संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस वर्ष महिला दिवस के लिए जो थीम तय किया है वह है “I am Generation Equality: Realizing Women’s Rights”. इस थीम के जरिये संयुक्त राष्ट्र महिलाओं की पीढ़ी को जोड़ रहा है और वह यह सुनिश्चित करना चाह रहा है कि हर पीढ़ी की महिलाएं एक दूसरे को सशक्त करें. किशोरावस्था से लेकर वृद्धावस्था तक एक पीढ़ी की समानता रहे और सभी एक दूसरे को संरक्षण देते हुए महिला अधिकारों की वकालत करें और उन्हें संरक्षित करें. इस थीम का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर महिलाओं को सशक्त करना है. यह थीम संयुक्त राष्ट्र के जेनरेशन इक्वेलिटी से जुड़ा हुआ है. 1995 में बीजिंग, चीन के सम्मेलन में जेनरेशन इक्वेलिटी मुहिम की शुरुआत हुई थी.

आज पूरा विश्व इस बात पर सहमत है कि तमाम प्रगति के बावजूद दुनिया में बहुसंख्यक महिलाएं आज भी अधिकारों से वंचित हैं और उनके साथ लैंगिक भेदभाव हो रहा है. इस भेदभाव को मिटाने और वैश्विक स्तर पर महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने के लिए इस बार संयुक्त राष्ट्र संघ ने यह थीम चुना है.

अमेरिकी महिलाओं ने काम के घंटों को लेकर आंदोलन शुरू किया था, जिसके बाद उनका आंदोलन एक मुहिम बना और अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की शुरुआत हुई. पिछले 25 वर्षों से संयुक्त राष्ट्र संघ महिला दिवस के लिए थीम का चयन करता है और उसी थीम के आधार पर हर वर्ष विश्व से लैंगिक असमानता मिटाने के लिए आंदोलन चलाया जाता है. इस वर्ष भी लैंगिक आधार पर भेदभाव मिटाने के लिए थीम का चयन किया गया है.

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Published by: Kumarvishwat sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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