Relationship Tips: क्या आपके घर में या फिर आप जिस रिश्ते में हैं उसमें ऐसा कभी हुआ है कि, जैसे ही कोई अपनी परेशानी या फिर दिल की बातों को आपके साथ शेयर करता है, आप बिना देर किये उसे सलाह देने लग जाते हैं? अक्सर हम सामने वाले से, “ऐसा कर लो”, “वैसा मत करो”, “मैं होता तो ये करता”, जैसी बातें अच्छे इरादों के साथ ही कहते हैं. जब हम सलाह दे रहे होते हैं तो हमें लगता है कि हम सामने वाले इंसान की भलाई कर रहे हैं या फिर उसकी मदद कर रहे हैं, लेकिन कई बार आपकी यही आदत रिश्तों में बढ़ती दूरियों की वजह बन सकती है. बता दें हर एक व्यक्ति जो आपके साथ अपनी बातों को शेयर कर रहा है, उसे यह बिलकुल भी नहीं चाहिए कि आप उसे सलाह देना शुरू कर दें, कई बार वह इंसान यह भी चाहता है कि आप उसकी बातों को बिना रोक-टोक के सुन लें. लेकिन जब आप सामने वाले को हद से ज्यादा सलाह देने लग जाते हैं तो यह मदद नहीं बल्कि स्ट्रेस की वजह बन जाता है. आज इस आर्टिकल में हम आपको विस्तार से बताने वाले हैं कि आपको कब सामने वाले को सलाह देना चाहिए और कब आपकी यह छोटी सी लगने वाली सलाह रिश्ते को खराब कर सकती है. तो चलिए जानते हैं विस्तार से.
हर व्यक्ति सलाह नहीं, अंडरस्टैंडिंग चाहता है
जब आपसे कोई भी व्यक्ति अपने दिल की बातों को या फिर प्रॉब्लम्स को शेयर करता है, तो यह बिलकुल भी जरूरी नहीं है कि वह आपके पास किसी सॉल्यूशन की तलाश में ही आया हो. कई बार वह सिर्फ यह चाहता है कि कोई उसकी बातों को ध्यान से सुने और उसके इमोशंस को समझे. लेकिन जब आप उसे लगातार सलाह देते रहते हैं तो उसे लगता है कि आप उसके इमोशंस को वैल्यू नहीं दे रहे हैं. अगर बार-बार ऐसा हो तो आगे चलकर वह कभी भी अपनी बातों को आपके साथ शेयर नहीं करेगा.
जरूरत से ज्यादा सलाह कॉन्फिडेंस कम कर सकती है
जब आप किसी को भी छोटी से छोटी बात पर सलाह देने लग जाते हैं, तो उसे ऐसा लगता है कि आप उसकी बुद्धि और फैसले लेने की काबिलियत पर भरोसा नहीं करते हैं. बार-बार ऐसा होते रहने की वजह से उसका कॉन्फिडेंस कमजोर पड़ने लग जाता है. अगर किसी रिश्ते में यह सोच बढ़ने लगे कि ‘मुझ पर भरोसा नहीं किया जाता है’, तो इसकी वजह से स्ट्रेस और नाराजगी काफी ज्यादा बढ़ सकती है.
बिना मांगे सलाह हर बार पसंद नहीं आती
कुछ लोगों को तब तक आपसे सलाह सुनना पसंद नहीं होता है जबतक वे खुद आपसे सामने से उसकी डिमांड न करें. जब आप बिना पूछे बार-बार सामने वाले को सुझाव देने लगते हैं तो उसे ऐसा लगता है कि आप दखलअंदाजी कर रहे हैं. खासतौर पर जब बात पति-पत्नी, दोस्त या फिर भाई-बहन के रिश्ते की होती है तो आपकी यह आदत बहस और गलतफहमियों की वजह बन सकती है. सलाह देने से पहले आपके लिए यह समझना और भी जरूरी हो जाता है कि क्या सामने वाला सच में आपसे सलाह चाहता है या फिर वह सिर्फ अपनी बातें आपसे कहना चाहता है.
पहले सुनें, फिर समझें
अगर आप एक अच्छे रिश्ते की पहचान करना चाहते हैं तो उसकी पहचान कभी भी सिर्फ सलाह देने में नहीं, बल्कि बातों को सुनने की कला में भी छुपी हुई होती है. जब भी कोई आपसे अपने प्रॉब्लम शेयर करे, तो तुरंत सलाह देने की जगह पर आपको पहले उसकी बातों को पूरी तरह से सुन लेना चाहिए. इसके बाद जाकर आपको उससे सवाल करना चाहिए और उसके इमोशंस को समझने की कोशिश करनी चाहिए. अगर आपको लगे कि सामने वाले को जरूरत है तभी जाकर उसके सामने अपनी राय रखें. जब आप ऐसा करते हैं तो सामने वाले को सम्मान और अपनेपन का एहसास होने लगता है.
सलाह देने का क्या है सही तरीका?
अगर आपको ऐसा लगता है कि आपकी दी हुई सलाह सामने वाले के काम आ सकती है, तो आपको पहले उससे पूछना चाहिए कि क्या इस मामले में वह आपकी राय सुनना चाहता है. जब सामने वाला पूरी तरह से तैयार हो, तब उसके लिए आपकी बातों को स्वीकार करने की संभावना और भी ज्यादा बढ़ जाती है. इसके अलावा आपको अपनी राय को उसके सामने हमेशा सुझाव की तरह ही रखना चाहिए, आदेश की तरह भूलकर भी नहीं. जब आप ऐसा करते हैं तो आप दोनों कीच बातचीत सहज बनी रहती है और रिश्तों में स्ट्रेस भी नहीं बढ़ता है.
