अपने बच्चे को खाना खिलाने के लिए फोन देना छोड़िए, अपनाइए ये स्मार्ट पैरेंटिंग टिप्स

Parenting Tips: अगर आपका बच्चा बिना मोबाइल देखे खाना नहीं खाता, तो चिंता की बात नहीं है. कुछ आसान पैरेंटिंग टिप्स अपनाकर आप बच्चों में हेल्दी ईटिंग हैबिट्स विकसित कर सकते हैं और उन्हें बिना स्क्रीन के खुशी-खुशी खाना खाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं.

Parenting Tips: आजकल कई माता-पिता की सबसे बड़ी चिंता यह होती है कि उनका बच्चा ठीक से खाना नहीं खाता. कुछ बच्चे खाने के दौरान बार-बार उठ जाते हैं, तो कुछ बिना मोबाइल या कार्टून देखे एक निवाला भी खाने को तैयार नहीं होते. ऐसे में पेरेंट्स अक्सर फोन का सहारा लेने लगते हैं, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह आदत लंबे समय में बच्चे के व्यवहार और खाने की आदतों पर असर डाल सकती है. अगर आप भी अपने बच्चे को बिना स्क्रीन के खाना खिलाना चाहते हैं, तो कुछ आसान तरीकों को अपनाकर यह काम आसान बना सकते है.

बच्चे को खुद खाने का मौका दें

जब बच्चा धीरे-धीरे चीजों को पकड़ना और समझना सीखने लगे, तो उसे अपने हाथों से खाना खाने का अवसर दें. इससे उसका आत्मविश्वास बढ़ता है और वह खाने को एक नई गतिविधि की तरह अपनाने लगता है. खुद खाना सीखने वाले बच्चों में भोजन के प्रति रुचि भी बढ़ सकती है.

खाने के लिए दबाव न बनाएं

हर दिन बच्चे की भूख एक जैसी नहीं होती. ऐसे में अगर वह किसी समय कम खाना खा रहा है, तो उसे बार-बार मजबूर करने से बचें. जबरदस्ती खिलाने से बच्चा खाने से और दूरी बना सकता है. बेहतर होगा कि उसे समय दिया जाए और उसकी भूख के संकेतों को समझा जाए.

अलग से पसंदीदा खाना बनाने की आदत छोड़ें

कई बार बच्चे घर का सामान्य खाना खाने से मना कर देते हैं और पेरेंट्स तुरंत उनकी पसंद की दूसरी चीज बना देते हैं. यह आदत बच्चे को चुनिंदा खाने की ओर बढ़ा सकती है. इसलिए उसे समझाएं कि परिवार के लिए जो भोजन तैयार हुआ है, वही उपलब्ध है.

परिवार के साथ बैठकर खाना खाएं

बच्चे अपने आसपास के लोगों से बहुत कुछ सीखते हैं. जब वह परिवार के सभी सदस्यों को साथ बैठकर खाना खाते देखता है, तो उसके अंदर भी वही आदत विकसित होने लगती है. इससे वह नए स्वादों और अलग-अलग प्रकार के भोजन को स्वीकार करना सीख सकता है.

ध्यान रखें कि बच्चों की खाने की आदतें धीरे-धीरे विकसित होती हैं. इसलिए धैर्य बनाए रखना और सकारात्मक माहौल देना सबसे महत्वपूर्ण कदम है.

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Published by: Pushpanjali

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