ग्रीन टी के अधिक इस्तेमाल से डैमेज हो सकता है लिवर? शोध में किया जा रहा दावा

एक अध्ययन में दावा किया गया है कि ग्रीन टी के अर्क का लंबे समय तक इस्तेमाल करना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है. इसके उपयोग से जहां कैंसर, डायबिटीज, मोटापे और हृदय रोग में कारगर माना जाता है, वहीं इसके अधिक इस्तेमाल से लिवर डैमेज होने का खतरा भी बढ़ जाता है.

भारत में कोरोना महामारी के बाद लोगों में अपने स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ी है. रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले फूड पर लोग अधिक ध्यान दे रहे हैं. हाल के दिनों में ग्रीन टी का चलन भी भारत में काफी तेजी बढ़ रहा है. वजन कम करने और फिट रहने के लिए लोग ग्रीन टी का सेवन कर रहे हैं. लेकिन एक शोध में बात सामने आयी है कि ग्रीन टी का अधिक इस्तेमाल हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है. आपका लिवर डैमेज तक हो सकता है.

ग्रीन टी के अर्क का लंबे समय तक इस्तेमाल हो सकता है घातक : शोध

एक अध्ययन में दावा किया गया है कि ग्रीन टी के अर्क का लंबे समय तक इस्तेमाल करना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है. इसके उपयोग से जहां कैंसर, डायबिटीज, मोटापे और हृदय रोग में कारगर माना जाता है, वहीं इसके अधिक इस्तेमाल से लिवर डैमेज होने का खतरा भी बढ़ जाता है. इसके ठोस संकेत द जर्नल ऑफ डाइटरी सप्लीमेंट्स में प्रकाशित रटगर्स शोध से मिले हैं. शोधकर्ताओं ने स्तन कैंसर पर ग्रीन टी के प्रभाव का अध्ययन किया गया.

ग्रीन टी में होता है अधिक कैफीन

ग्रीन टी को सेहत के लिए अच्छा माना जाता है, लेकिन अधिक सेवन नुकसान पहुंचा सकता है. इसके लिए इसमें अधिक मात्रा में मौजूद कैफीन को जिम्मेदार माना जा रहा है. इसके अधिक सेवन से उल्टी की शिकायत, नींद न आना, चक्कर और बेचैनी की शिकायत बढ़ जाता है.

एंटीऑक्सिडेंट सेहत के लिए हानिकारक

ग्रीन टी में प्राकृतिक रूप से एंटीऑक्सिडेंट की मात्रा कम होती है, लेकिन इसके अधिक सेवन से इसकी मात्रा बढ़ जाती है, जो सेहत के लिए काफी हानिकारक हो सकता है.

Disclaimer

इस खबर की पुष्टि प्रभात खबर नहीं करता. इसे शोध में जो दावा किया गया है, उसके आधार पर तैयार किया गया है. किसी भी उपाय को आजमाने से पहले डॉक्टर से जरूर संपर्क कर लेना चाहिए.

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लेखक के बारे में

By Arbindkumar mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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