Kitchen Gardening Tips: आजकल लोग हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने के लिए कई नए तरीके अपना रहे हैं. इन्हीं में से एक है पॉट्स में किचन गार्डनिंग. अगर आपके घर में बड़ी छत या बगीचा नहीं है, तब भी आप छोटे-छोटे गमलों में कई तरह की सब्जियां, हरी पत्तेदार सब्जियां और मसाले आसानी से उगा सकते हैं. इससे न सिर्फ ताजी और केमिकल-फ्री सब्जियां मिलती हैं, बल्कि घर की खूबसूरती भी बढ़ जाती है. थोड़ी-सी जगह और सही देखभाल के साथ आप अपना छोटा-सा किचन गार्डन तैयार कर सकते हैं.
सही गमले और मिट्टी का करें चुनाव
गमले का आकार पौधे के हिसाब से चुनें. छोटे पौधों के लिए 6 से 8 इंच का गमला और टमाटर या बैंगन जैसे पौधों के लिए 10 से 12 इंच का गमला बेहतर रहता है. ध्यान रखें कि गमले के नीचे पानी निकलने के लिए छेद जरूर हो. मिट्टी तैयार करते समय सामान्य मिट्टी में गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट और थोड़ी रेत मिलाएं. इससे मिट्टी हल्की रहती है और पौधों की जड़ें अच्छी तरह बढ़ती हैं.
धूप और पानी का रखें ध्यान
ज्यादातर सब्जियों को रोजाना 5 से 6 घंटे धूप की जरूरत होती है. इसलिए गमलों को ऐसी जगह रखें जहां अच्छी धूप (Kitchen Gardening Tips) आती हो. पानी तभी दें जब मिट्टी की ऊपरी सतह सूखी महसूस हो. जरूरत से ज्यादा पानी देने से पौधों की जड़ें खराब हो सकती हैं.
प्राकृतिक खाद का करें इस्तेमाल
अगर आप पूरी तरह ऑर्गेनिक किचन गार्डन चाहते हैं, तो केमिकल खाद की जगह घर में बनने वाली कम्पोस्ट, गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट (Kitchen Gardening Tips) का इस्तेमाल करें. महीने में एक या दो बार खाद देने से पौधे तेजी से बढ़ते हैं.
कीड़ों से बचाने के आसान उपाय
पौधों पर कीड़े दिखाई दें तो तुरंत तेज केमिकल का इस्तेमाल न करें. नीम के तेल का स्प्रे, लहसुन और मिर्च का घोल या साबुन वाले पानी का हल्का छिड़काव कई छोटे कीड़ों को दूर रखने में मदद करता है. साथ ही समय-समय पर सूखी और खराब पत्तियों को हटाते रहें.
गमलों में कौन-कौन सी चीजें उगा सकते हैं?
किचन गार्डन की शुरुआत ऐसी फसलों से करें जिन्हें उगाना आसान हो. धनिया, पुदीना, हरी मिर्च, टमाटर, पालक, मेथी, करी पत्ता, तुलसी और हरा प्याज गमलों में अच्छी तरह उग जाते हैं. इसके अलावा लेट्यूस और छोटी किस्म की बैंगन या शिमला मिर्च भी आसानी से उगाई जा सकती है.
Kitchen Gardening Tips: किचन गार्डनिंग के फायदे
गमलों में किचन गार्डनिंग करने से हमेशा ताजी सब्जियां और हर्ब्स मिलते हैं. बाजार से बार-बार खरीदारी की जरूरत कम होती है और खाने में केमिकल का खतरा भी घटता है. बच्चों को भी इससे पेड़-पौधों और पर्यावरण के बारे में सीखने का मौका मिलता है.
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