रेस्टोरेंट में बैठते ही सबसे पहले पानी का ग्लास क्यों दिया जाता है? जानिए इसके पीछे का साइकोलॉजिकल गेम

Do You Know: क्या आपने कभी सोचा है कि रेस्टोरेंट में बैठते ही सबसे पहले आपके सामने पानी का ग्लास क्यों रख दिया जाता है? यह सिर्फ मेहमाननवाजी नहीं, बल्कि इसके पीछे साइकोलॉजी और स्मार्ट बिजनेस स्ट्रेटेजी भी छिपी होती है. तो चलिए जानते हैं इसके पीछे की दिलचस्प वजहें.

Do You Know: क्या आपके दिमाग में यह सवाल आया है कि जैसे ही आप किसी रेस्टोरेंट में जाते हैं, तो टेबल पर बैठते ही आपके सामने पानी का ग्लास क्यों रख दिया जाता है? अगर आपके दिमाग में यह सवाल आया है लेकिन आपने इसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया है, तो आज की यह आर्टिकल आपके काम की हो सकती है. बता दें टेबल पर बैठते ही सबसे पहले पानी देना सिर्फ एक फॉर्मेलिटी नहीं होती है, बल्कि इसके पीछे एक बहुत ही सोची-समझी साइकोलॉजी और बिजनेस स्ट्रेटेजी काम करती है. तो चलिए जानते हैं कि आखिर क्यों रेस्टोरेंट वाले ऐसा करते हैं और इसके पीछे कौन सी चौंका देने वाली वजहें छिपी हुई होती हैं.

मेहमाननवाजी और अपनेपन का अहसास

हमारे देश में मेहमान को हमेशा से ही भगवान का रूप माना जाता रहा है. जब भी कोई हमारे घर आता है, हम सबसे पहले उसे पानी देते हैं ताकि उसकी थकावट थोड़ी कम हो जाए और उसे आराम महसूस हो. रेस्टोरेंट वाले भी आपकी इसी आदत का फायदा उठाते हैं. जैसे ही आपके सामने पानी आता है, आपको अच्छा लगता है और लगता है कि आपकी परवाह की जा रही है. इससे आपका मूड बढ़िया हो जाता है और आप वहां आराम से बैठ जाते हैं.

भूख और प्यास का कनेक्शन

कई बार जब हम बाहर से आते हैं, तो थके होते हैं और हमें प्यास भी लगी हुई होती है. ऐसे में हमारा दिमाग कई बार भूख और प्यास में फर्क नहीं समझ पाता. पानी पीते ही आपकी प्यास बुझती है और दिमाग शांत हो जाता है. जब दिमाग शांत होता है, तो आप बिना किसी जल्दबाजी के आराम से मेन्यू कार्ड देखते हैं और तसल्ली से अपनी पसंद का खाना ऑर्डर करते हैं.

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भूख बढ़ाने की तरकीब

कुछ जानकारों के अनुसार जब हम खाली पेट पानी पीते हैं तो इससे हमारे पेट का सिस्टम एक्टिव हो जाता है. इससे भूख और भी ज्यादा तेज लगने लगती है. अब जाहिर सी बात है कि जब आपको ज्यादा भूख लगेगी, तो आप सिर्फ एक चीज तो ऑर्डर नहीं ही करेंगे. आप सूप, स्टार्टर, मुख्य खाना और बाद में मीठा भी ऑर्डर कर देंगे. इसका साफ मतलब होता है कि पानी आपके पेट को ज्यादा खाने के लिए तैयार कर देता है.

इंतजार को आसान बनाना

रेस्टोरेंट में ऑर्डर देने के बाद खाना टेबल तक आने में 15 से 20 मिनट का समय लग जाता है. खाली बैठे-बैठे यह इंतजार बहुत लंबा और बोरिंग लगने लगता है. लेकिन जब टेबल पर पानी का ग्लास होता है, तो लोग बातें करते-करते धीरे-धीरे पानी पीते रहते हैं. इससे उनका ध्यान बंटा रहता है और पता ही नहीं चलता कि 15 से 20 मिनट का यह समय कब बीत गया.

बातचीत की हो जाती है शुरुआत

जब हम दोस्तों या परिवार के साथ किसी रेस्टोरेंट में खाने के लिए जाते हैं, तो शुरुआत में सब थोड़े चुप होते हैं कि बात कहां से शुरू करें. वेटर का आना और पानी देना एक छोटा सा ब्रेक देता है. ऐसे में पानी पीने के बहाने लोग आपस में बात करना शुरू कर देते हैं और माहौल भी पहले की तुलना में ज्यादा लाइट हो जाता है.

बिजनेस बढ़ाने का एक स्मार्ट तरीका

शुरुआत में फ्री पानी देना रेस्टोरेंट के बिजनेस के लिए बहुत फायदेमंद होता है. जब ग्राहक को अच्छी सर्विस और इज्जत मिलती है, तो वह खुश होकर ज्यादा पैसे खर्च करने को तैयार हो जाता है. एक अच्छा एक्सपीरियंस मिलने पर वह अगली बार भी उसी रेस्टोरेंट में आना पसंद करता है और दूसरों को भी वहां जाने की सलाह देता है. तो अगली बार जब आप किसी रेस्टोरेंट में बैठें और वेटर आपके सामने पानी रखे, तो समझ जाइए कि आपको खुश करने और आपकी भूख बढ़ाने का खेल शुरू हो चुका है.

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लेखक के बारे में

Published by: Saurabh Poddar

सौरभ पोद्दार एक लाइफस्टाइल जर्नलिस्ट हैं और पिछले 4 सालों से डिजिटल मीडिया में एक्टिव हैं. उन्होंने रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है. फिलहाल, सौरभ 'प्रभात खबर' के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रहे हैं. सौरभ को उन विषयों पर लिखना सबसे ज्यादा पसंद है, जो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं. उनके आर्टिकल्स में आपको हेल्थ, फिटनेस, स्किन-हेयर केयर, पेरेंटिंग, हेल्दी रेसिपीज, घरेलू नुस्खे, रिलेशनशिप और वास्तु शास्त्र जैसी उपयोगी जानकारियां मिलेंगी. फिटनेस और अच्छी सेहत सौरभ की निजी जिंदगी का भी अहम हिस्सा हैं. वे जिन विषयों पर लिखते हैं, उन्हें अपनी रूटीन में फॉलो भी करते हैं. उनका मानना है कि जब आप किसी चीज को खुद एक्सपीरियंस करते हैं, तभी दूसरों तक सही और प्रैक्टिकल जानकारी पहुंचा सकते हैं. उनकी हमेशा यही कोशिश रहती है कि वे ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर बिल्कुल आसान और आम बोलचाल की भाषा में लिखें, ताकि हर पाठक उसे आसानी से समझ सके. यही वजह है कि उनके लिखे आर्टिकल्स काफी एंगेजिंग और एसईओ फ्रेंडली होते हैं.

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