Chanakya Niti: चाणक्य नीति के एक श्लोक में आचार्य चाणक्य बताते हैं कि कैसे अलग-अलग गुणों वाले लोगों के लिए संसार की सबसे बड़ी से बड़ी चीजें भी तिनके के समान हो जाती हैं. समय और परिस्थिति के अनुसार इस संसार में हर चीज का महत्व बढ़ता और घटता चला जाता है.
जब मनुष्य ज्ञान, साहस, संयम और वैराग्य को प्राप्त कर लेता है, तब संसार की कई चीजों का महत्व स्वतः ही कम हो जाता है. – चाणक्य नीति
चाणक्य नीति श्लोक
तृणं ब्रह्मविदः स्वर्गं तृणं शूरस्य जीवनम्।
जिताशस्य तृणं नारी निःस्पृहस्य तृणं जगत्॥
श्लोक का अर्थ
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि ब्रह्म को जानने वाले ज्ञानी व्यक्ति के लिए स्वर्ग भी तिनके के समान होता है. वीर व्यक्ति अपने जीवन को तिनके के समान समझता है क्योंकि उसके लिए साहस और कर्तव्य सबसे बड़े होते हैं. जिसने अपनी इंद्रियों और इच्छाओं पर नियंत्रण पा लिया है, उसके लिए स्त्री का आकर्षण भी तिनके के समान हो जाता है और जो व्यक्ति पूरी तरह से इच्छाओं से मुक्त हो जाता है, उसके लिए यह पूरा संसार भी तिनके के समान लगता है.
1. क्या ज्ञान पाने के बाद स्वर्ग का मोह खत्म हो जाता है?
चाणक्य के अनुसार सच्चा ज्ञानी व्यक्ति स्वर्ग की इच्छा नहीं करता. उसे ब्रह्म ज्ञान मिल जाने के बाद बाहरी सुखों का आकर्षण समाप्त हो जाता है.
2. क्या वीर व्यक्ति को अपने जीवन का डर नहीं होता?
साहसी व्यक्ति कर्तव्य को जीवन से भी बड़ा मानता है. इसलिए वह कठिन परिस्थितियों में भी पीछे नहीं हटता और अपने जीवन की परवाह किए बिना सही काम करता है.
4. इंसान के दुखी होने का क्या कारण है?
अधिक इच्छाएं व्यक्ति को अस्थिर और दुखी बनाती हैं. जब इच्छाएं कम हो जाती हैं, तब मन में शांति और संतोष आता है.
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