Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य को अपने समय के सबसे ज्ञानी और बुद्धिमान पुरुष के तौर पर भी जाना जाता है. आचार्य चाणक्य सिर्फ एक महान शिक्षक नहीं थे बल्कि मानव स्वभाव की भी उन्हें गहरी समझ थी. अपनी नीतियों में उन्होंने जिन बातों का जिक्र किया है वे आज के समय में भी मानवजाति को एक सही रास्ता दिखाने का काम कर रहे हैं. चाणक्य ने अपनी नीतियों में कुछ ऐसी गलत आदतों का भी जिक्र किया है जिन्हें अगर एक इंसान सही समय पर सुधार नहीं लेता है तो उसके दिमाग की ताकत समय के साथ खत्म होती चली जाती है. उनके अनुसार आपको जितनी जल्दी हो सके इन आदतों को पहचानना चाहिए और इन्हें बदल भी लेना चाहिए. जब आप ऐसा करते हैं तो आपकी सोच, फोकस और फैसले लेने की कैपिसिटी मजबूत और बेहतर होती चली जाती है. चलिए इन गलत आदतों के बारे में जानते हैं विस्तार से.
निगेटिव थिंकिंग के कारण
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि अगर आप हमेशा निगेटिव थिंकिंग रखते हैं तो आपका दिमाग देखते ही देखते कमजोर होता चला जाता है. उनके अनुसार दिमाग में निगेटिव चीजें होने की वजह से इंसान को डर और चिंता के बीच अपना जीवन बिताना पड़ता है. जब आप निगेटिव चीजें ही सोचते हैं तो आपके अंदर की क्रिएटिविटी खत्म हो जाती है और साथ ही आप प्रॉब्लम्स को भी सॉल्व नहीं कर पाते हैं.
गलत संगति में रहना
चाणक्य नीति के अनुसार जब आप गलत संगति में रखते हैं तो आपके विचारों और सोच पर भी काफी गलत असर पड़ता है. चाणक्य के अनुसार आप वैसे ही बनते चले जाते हैं जैसी संगति में आप रहते हैं. अगर आप निगेटिव और आलसी लोगों के साथ रहेंगे तो आपका दिमाग देखते ही कमजोर होता चला जाएगा.
अधूरा ज्ञान और पढ़ाई से दूरी
आचार्य चाणक्य ने हमेशा ही अपनी नीतियों में ज्ञान के महत्व पर जोर दिया है. वे कहते थे कि अगर आप एक ऐसे इंसान हैं जो पढ़ाई या फिर नयी चीजें सीखने से दूर रहते हैं तो आपका दिमाग देखते ही देखते कमजोर होता चला जाएगा. जब आप अपने अंदर के ज्ञान को बढ़ाते हैं तो आपकी आपके सोचने की क्षमता भी बढ़ती है, समझदारी आती है और साथ ही आप सही फैसले भी मजबूती से ले पाते हैं.
स्ट्रेस और चिंता से दिमाग होता है कमजोर
चाणक्य नीति के अनुसार हद से ज्यादा स्ट्रेस और चिंता करना भी आपके दिमाग के लिए काफी हानिकारक हो सकता है. चाणक्य के अनुसार मानसिक शांति के बिना कभी भी आपकी बुद्धि और फोकस एक ही जगह पर कायम नहीं रह सकता है. जब आप स्ट्रेस लेते हैं तो आपके फैसले लेने की कैपिसिटी और याददाश्त दोनों ही कमजोर हो जाती है.
Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारियों और मान्यताओं पर आधारित है. प्रभात खबर इसकी पुष्टि नहीं करता है.
