मेनोपॉज के बाद महिलाओं के शरीर में कई बदलाव आते हैं. इस दौरान हॉट फ्लैशेज, मूड में बदलाव और नींद से जुड़ी परेशानियां आम हैं. लेकिन एक बदलाव ऐसा भी है, जिस पर अक्सर ध्यान नहीं जाता और वह है हड्डियों का कमजोर होना. मेनोपॉज के बाद हड्डियों का घनत्व तेजी से कम हो सकता है, जिससे आगे चलकर फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है. डॉ. अतुल श्रीवास्तव, कंसल्टेंट - ऑर्थोपेडिक्स एवं जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी, नारायणा हॉस्पिटल, हावड़ा बताते हैं कि मेनोपॉज के बाद शुरुआती कुछ वर्षों में हड्डियों की कमजोरी तेजी से बढ़ सकती है. इसकी खास बात यह है कि शुरुआत में इसका कोई साफ लक्षण नजर नहीं आता. कई बार मामूली गिरने के बाद फ्रैक्चर होने पर ही हड्डियों की कमजोरी का पता चलता है.
मेनोपॉज के बाद क्यों कमजोर होती हैं हड्डियां?
मेनोपॉज के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम हो जाता है. यह हार्मोन हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है. एस्ट्रोजन कम होने पर हड्डियों के टूटने की प्रक्रिया तेज हो जाती है और नई हड्डी बनने की रफ्तार कम पड़ने लगती है. इसी वजह से इस उम्र में हड्डियों का घनत्व तेजी से घट सकता है.
कूल्हे, रीढ़ और कलाई पर ज्यादा खतरा
मेनोपॉज के बाद कूल्हे, रीढ़ और कलाई में फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है. कूल्हे का फ्रैक्चर गंभीर हो सकता है और लंबे समय तक चलने-फिरने में परेशानी दे सकता है. रीढ़ की हड्डियों में कमजोरी से पीठ दर्द, कद कम होना और शरीर का आगे की ओर झुकना जैसी समस्याएं हो सकती हैं. वहीं, गिरने पर कलाई में फ्रैक्चर भी हो सकता है.
इन आसान उपायों से रखें हड्डियों का ख्याल
डॉक्टर की सलाह से DEXA बोन डेंसिटी टेस्ट कराया जा सकता है. नियमित वेट-बेयरिंग और रेजिस्टेंस एक्सरसाइज हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत रखने में मदद करती हैं. इसके साथ ही पर्याप्त कैल्शियम और विटामिन डी लेना जरूरी है. धूम्रपान से दूरी रखें और शराब का सेवन सीमित करें.
घर में फिसलने या गिरने की वजह बनने वाली चीजों को हटाना भी जरूरी है. मेनोपॉज के बाद हड्डियों की सेहत को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते जांच और सही देखभाल शुरू करना बेहतर है. इससे आने वाले वर्षों में फ्रैक्चर के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है.
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