सौरमंडल में घूम रहा है अबतक खोजा गया सबसे बड़ा धूमकेतु बर्नैडिनेली -बनर्स्ट्रीन

पेरिस के वैज्ञानिक डाॅ इमैनुएनल लेलाॅउच ने कहा है कि इस धूमकेतु की चौड़ाई के बारे में अनुमान लगाया गया था कि यह 100 किलोमीटर का होगा लेकिन इस धूमकेतु का व्यास 137 किलोमीटर का है.

सौरमंडल में एक नया धूमकेतु बहुत तेजी से घूम रहा है जिसके बारे में वैज्ञानिकों का दावा है कि यह अबतक खोजे गये सभी धूमकेतु से बढ़ा है. इस धूमकेतु को पेंसिलवेनिया यूनिवर्सिटी के एक स्टूडेंट पेड्रो बर्नैडिनेली और एस्ट्रोनाॅमर बनर्स्ट्रीन ने ढूंढ़ा है इसलिए इस धूमकेतु को बर्नैडिनेली -बनर्स्ट्रीन नाम दिया गया है.

137 किलोमीटर है चौड़ाई

आजतक के अनुसार पेरिस के वैज्ञानिक डाॅ इमैनुएनल लेलाॅउच ने कहा है कि इस धूमकेतु की चौड़ाई के बारे में अनुमान लगाया गया था कि यह 100 किलोमीटर का होगा लेकिन इस धूमकेतु का व्यास 137 किलोमीटर का है. यह धूमकेतु पिछले साल सौरमंडल में प्रवेश किया है हालांकि इसकी खोज 2014 में हुई थी.

डार्क एनर्जी कैमरा से हुई खोज

इसकी खोज एक डार्क एनर्जी कैमरा से की गयी है. काफी ताकतवर टेलिस्कोप से अध्ययन करने पर इसके व्यास के बारे में पता चला है. यह 23 जनवरी 2031 को सूर्य के सबसे नजदीक पहुंचेगा. उस समय धरती से इसकी दूरी सूर्य से धरती की दूरी की 11 गुना होगी.

उर्ट क्लाउड से निकला है धूमकेतु

हार्वर्ड एंड स्मिसोनियन के एस्ट्रोनाॅमर पीटर वर्स ने बताया कि इस धूमकेतु के अध्ययन के लिए हमारे पास 20 साल का समय है. यह रोमांचक मौका है, चूंकि यह धूमकेतु उर्ट क्लाउड से निकला है जहां पर बर्फ के मैदान है और बर्फीले पत्थरों का कचरा भरा पड़ा है, इसलिए इसके बारे में और अधिक जानना रोमांचक होगा.

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Published by: Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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