अनजाने में बच्चों को कमजोर बना रही हैं ये 5 पेरेंटिंग आदतें, कहीं आप भी तो नहीं करते?

बच्चों की परवरिश आसान नहीं है, लेकिन कुछ आम गलतियां अनजाने में पेरेंट्स कर देते हैं जो बच्चों के आत्मविश्वास को ठेस पहुंचा सकती हैं. इस लेख में जानें उन 5 गलतियों के बारे में जिन पर ध्यान देना जरूरी है.

Parenting Tips: बच्चों की परवरिश आसान काम नहीं है. हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा पढ़ाई में अच्छा करे, आत्मविश्वासी बने और जिंदगी में आगे बढ़े. लेकिन कई बार बच्चों को बेहतर बनाने की कोशिश में पेरेंट्स ऐसी आदतें अपना लेते हैं, जिनका असर बच्चे के व्यवहार और आत्मविश्वास पर पड़ सकता है. खास बात यह है कि इन आदतों का एहसास माता-पिता को अक्सर नहीं होता. आइए जानते हैं ऐसी 5 आदतों के बारे में, जिन पर पेरेंट्स को ध्यान देना चाहिए.

1. हर काम में कमी निकालना

अगर बच्चा अच्छे नंबर लाता है, ड्राइंग बनाता है या कोई काम खुद करने की कोशिश करता है, फिर भी पेरेंट्स उसकी गलती पर ही ध्यान दें, तो बच्चे को बुरा लग सकता है. बार-बार कमियां बताने से उसे लगने लगता है कि वह कुछ भी सही नहीं कर पाता. इसलिए गलती बताने के साथ उसकी कोशिश की तारीफ भी करें.

2. दूसरे बच्चों से तुलना करना

“देखो, तुम्हारा दोस्त कितना अच्छा पढ़ता है” जैसे वाक्य बच्चों को मोटिवेट करने के बजाय उनका आत्मविश्वास कम कर सकते हैं. हर बच्चे की अपनी क्षमता और सीखने की रफ्तार होती है. दूसरों से तुलना करने के बजाय बच्चे को उसकी पिछली उपलब्धियों से बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित करें.

3. बच्चे की भावनाओं को छोटा समझना

बच्चा किसी बात पर रो रहा है या परेशान है, तो उसे तुरंत “इतनी सी बात पर क्यों रो रहे हो?” कहना सही तरीका नहीं है. पहले उसकी बात सुनें और समझने की कोशिश करें कि उसे परेशानी किस बात से हुई. इससे बच्चा अपनी भावनाएं खुलकर बताना सीखता है.

4. हर फैसला खुद लेना

बच्चे के कपड़े, दोस्त, पढ़ाई और छोटी-छोटी पसंद का फैसला हमेशा माता-पिता ही करें, तो उसमें खुद निर्णय लेने की आदत कम हो सकती है. उम्र के हिसाब से उसे छोटे फैसले खुद लेने दें. इससे उसमें जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता बढ़ती है.

5. प्यार को शर्तों से जोड़ना

“अच्छे नंबर आएंगे तभी गिफ्ट मिलेगा” जैसी बातें कभी-कभी बच्चे को यह महसूस करा सकती हैं कि प्यार उसकी उपलब्धियों पर निर्भर है. नियम और अनुशासन जरूरी हैं, लेकिन बच्चे को यह भरोसा भी होना चाहिए कि गलती या असफलता के बावजूद माता-पिता उसके साथ हैं.

परवरिश में छोटी-सी शुरुआत करें

परफेक्ट पेरेंट बनने की कोशिश करने के बजाय बच्चे को समझने की कोशिश करना ज्यादा जरूरी है. उसकी बात सुनें, गलतियों पर शांत होकर समझाएं और छोटी उपलब्धियों की भी तारीफ करें. घर का सुरक्षित और प्यार भरा माहौल बच्चे के आत्मविश्वास को मजबूत बनाने में मदद कर सकता है.

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