Health: प्लास्टिक के उपयोग से बढ़ रहा हृदय रोग का खतरा, एक नये अध्ययन में हुआ खुलासा

हम सब अपने घरों में प्लास्टिक से बनी कितनी ही वस्तुओं का रोजाना इस्तेमाल करते हैं, इस बात से अनजान कि यह हमारे लिए कितना बड़ा खतरा साबित हो रहा है. एक नये अध्ययन से सामने आया है कि इसका उपयोग हृदय रोग को बढ़ा रहा है.

Health: प्लास्टिक से बनी वस्तुओं का उपयोग किसी न किसी रूप में हम सभी के घर में होता ही है. पर इसका उपयोग हमारे लिए घातक साबित हो सकता है, इससे अधिकांश लोग अनजान ही हैं. बीते महीने जर्नल लांसेट इ-बायोमेडिसिन में प्रकाशित एक रिपोर्ट के निष्कर्ष तो इसी ओर संकेत कर रहे हैं. रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि प्लास्टिक के घरेलू सामान बनाने के लिए जिन रसायनों का उपयोग किया जाता है, उनमें से कुछ रसायनों के रोजाना संपर्क में आने से 2018 में अकेले हृदय रोग से तीन लाख से अधिक लोगों की मृत्यु हुई है. इस बात का पता चला है जनसंख्या सर्वेक्षणों के एक नये विश्लेषण से. इस विश्लेषण के नतीजे यह भी बताते हैं कि भले ही प्लास्टिक का सामान बनाने के लिए वैश्विक स्तर पर थैलेट रसायन का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है, पर इससे होने वाली मृत्यु का बोझ अन्य क्षेत्रों की तुलना में मध्य पूर्व, दक्षिण एशिया, पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र पर बहुत अधिक है. कुल मौतों का लगभग तीन चौथाई.

हानिकारक रसायन है थैलेट

फैलेट हमारे लिए हानिकारक हैं, दशकों से विशेषज्ञ इस बात को मानते रहे हैं. पर अभी तक वे हमारे अनेक हेल्थ प्रॉब्लम का कारण सौंदर्य प्रसाधन, डिटर्जेंट, सॉल्वेंट, प्लास्टिक के पाइप, कीटनाशक समेत अन्य उत्पादों में पाये जाने वाले रसायन (थैलेट) के संपर्क में आने को मानते रहे हैं. अनेक अध्ययनों ने बताया है कि जब ये रसायन सूक्ष्म कणों में टूटते हैं और जब हम इसे निगल लेते हैं, तब इनका दुष्प्रभाव ओबेसिटी और डायबिटीज से लेकर फर्टिलिटी इश्यू तथा कैंसर के जोखिम के रूप में सामने आता है.

हृदय रोग से साढ़े तीन लाख से अधिक लोगों के मौत का अनुमान

इस रिसर्च को न्यूयॉर्क स्थित एनवाइयू लैंगोन हेल्थ के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किया गया है. वर्तमान अध्ययन में रिसर्चरों ने डाइ-टु-इथाइलहेक्साइल थैलेट (डीइपीएच) नामक एक तरह के थैलेट पर अपना ध्यान केंद्रित किया. इस रसायन का उपयोग फूड कंटेनर, मेडिकल इक्विपमेंट और अन्य प्लास्टिक को नरम और अधिक लचीला बनाने के लिए किया जाता है. अपने अध्ययन में शोधार्थियों ने पाया कि इस रसायन के संपर्क में आने से हृदय की धमनियों में सूजन आने की संभावना बढ़ जाती है, जो समय के साथ दिल का दौरा या स्ट्रोक का कारण बन सकता है. शोधार्थियों का अनुमान है कि 2018 में वैश्विक स्तर पर हृदय रोग से होने वाली कुल मृत्यु (55 से 64 वर्ष के पुरुषों एवं महिलाओं में) में डीइएचपी (DEHP) ने 3,56,328 मौत या 13 प्रतिशत से अधिक का योगदान दिया है.

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