आयुर्वेद में भी बच्चों को दी जाती हैं वैक्सीन, बस दो बूंद रखेंगी उन्हें कई रोगों से दूर

Swarnaprash क्या आपको मालूम है जिस तरह पोलियो, हेपेटाइटिस बी व अन्य तरह के रोगों से बच्चों को दूर रखने के लिए वैक्सीन पिलाया जाता है, उसी तरह आयुर्वेद में भी टीकाकरण किया जाता हैं. आज हम आपको अपने इस रिर्पोट में देने वाले है इसी से संबंधीत कुछ जानकारी

क्या आपको मालूम है जिस तरह पोलियो, हेपेटाइटिस बी व अन्य तरह के रोगों से बच्चों को दूर रखने के लिए वैक्सीन पिलाया जाता है, उसी तरह आयुर्वेद में भी टीकाकरण किया जाता हैं. आज हम आपको अपने इस रिर्पोट में देने वाले है इसी से संबंधीत कुछ जानकारी-

जानें क्या है टीकाकरण

किसी बीमारी के विरुद्ध प्रतिरोधात्मक क्षमता को बढ़ाने के लिए जो दवा खिलायी या पिलायी जाती है उसे टीका मतलब वैक्सीन कहा जाता है. संक्रामक रोगों से रोकथाम के लिये टीकाकरण सर्वाधिक प्रभावी एवं सबसे सस्ती विधि माना जाता रही है.

टीका, एन्टिजनी (antigenic) पदार्थ होता हैं. टीके के रूप में दी जाने वाली दवा या तो शरीर में रोग फैलाने वाले वायरस को मारकर या इसके प्रभाव को निष्कर्य कर ब्लड सर्कुलेशन को सही कर देती है. आपको बता दें कि चेचक का टीका भारत में सबसे पहले आजमाया गया था.

दरअसल स्वर्ण प्राशन एक ऐसी आयुर्वेदिक प्रक्रिया है जिसमें बच्चों को टीके के तौर पर तरल, अर्ध ठोस या पेस्ट के रूप में वैक्सीन दिया जाता है. इसें शहद और घी के साथ देना लाभकारी होता है. ‘स्वर्ण’ का अर्थ है ‘सोना’ और ‘प्राशन’ का अर्थ है भोजन. इससे मंदबुद्धि बच्चें ही नहीं बल्कि गर्भ के अंदर पल रहे अपरिपक्व शिशु का भी विकास सही तरीके से होता हैं. बच्चों में विकास, स्मृति और प्रतिरक्षा के विकास के लिए आयुर्वेद में वर्णित आवश्यक अनुष्ठानों में से एक है यह विधि. विशेषज्ञों की मानें तो यह ड्रॉप उनके लिए भी कारगार है जो शिशु को जन्म नहीं दे पाती.

इसे अन्य नामों से भी जाना जाता है, जैसे स्वर्ण बिन्दू प्राशन, स्वर्णमंथन प्रशन, हिरण्य प्राशन, सुवर्ण प्रधान.

इस टीके को माताएं जब गर्भधारण करतीं है तब से ही लेना शुरू कर देना चाहिए. आने वाले बच्चें के मानसिक विकास में काफी लाभकारी साबित होगा.

स्वर्णप्राशन को देने की विधि

आयुर्वेद में एसी मान्यता है कि हर महीने के पुष्य नक्षत्र में ही इस ड्रॉप को देने से बच्चों को लाभ होता है. आपको बता दें कि हर 27 दिन में पुष्यनक्षत्र आता है. जानें विभिन्न उम्र के बच्चों को स्वर्ण प्राशन देने की विधि.

– 5 साल तक के शिशुओं को 1 बूंद हर पुष्यनक्षत्र के दिन लेना है

– 5 से 10 साल तक के शिशुओं को 2 बूंद हर पुष्यनक्षत्र के दिन लेना है

– 10 से 16 साल तक के शिशुओं को 3 बूंद हर दिन जब लेना है:

यह जानकारी भी है आपके लिए जरूरी

– आयुष की डॉ वर्तिका कि मानें तो इस ड्रॉप को चिकित्सक के निरीक्षण में ही दें.

– और इसे सुबह खाली पेट ही देना चाहिए

– इसे देने के बाद बच्चों को कम से कम 30 मिनट तक भोजन न करवाएं

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By Sumitkumar1248654

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