दरभंगा के कमतौल से शिवेंद्र कुमार शर्मा की रिपोर्ट
दरभंगा: मिथिला के प्रसिद्ध धार्मिक एवं ऐतिहासिक तीर्थस्थल अहल्यास्थान के विकास और सौंदर्यीकरण को नई गति मिलने जा रही है. रविवार 14 जून को 12.77 करोड़ रुपये की लागत से होने वाले विकास कार्यों का शिलान्यास मधुबनी सांसद डॉ. अशोक यादव और जाले विधायक जीवेश कुमार करेंगे. इस परियोजना से रामायण सर्किट में शामिल अहल्यास्थान को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा जाएगा और श्रद्धालुओं को बेहतर व्यवस्था मिलेगी.
रामायण सर्किट का महत्वपूर्ण तीर्थस्थल
दरभंगा जिले के जाले प्रखंड स्थित अहियारी गांव में अवस्थित अहल्यास्थान रामायण सर्किट का प्रमुख धार्मिक स्थल है. मान्यता है कि त्रेता युग में गुरु विश्वामित्र के साथ जनकपुर जाते समय भगवान श्रीराम और लक्ष्मण यहां पहुंचे थे. गुरु की आज्ञा पर भगवान श्रीराम ने महर्षि गौतम के शाप से पत्थर बनी देवी अहल्या का उद्धार किया था. तभी से यह स्थल आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र माना जाता है.
सालभर उमड़ते हैं श्रद्धालु
अहल्यास्थान में वर्षभर देश-विदेश से श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं. चैत रामनवमी पर यहां पखवाड़े भर चलने वाले मेले को राजकीय मेले का दर्जा प्राप्त है. वहीं अक्षय नवमी पर तीन दिवसीय राजकीय महोत्सव आयोजित होता है, जिसमें कई प्रसिद्ध कलाकार अपनी प्रस्तुति देते हैं.
विशेष धार्मिक मान्यता
स्थानीय मान्यता के अनुसार देवी अहल्या को बैंगन का भार अर्पित करने से मस्सा जैसी शारीरिक समस्या से राहत मिलती है. यहां देवी अहल्या की पूजा-अर्चना केवल महिला पुजारन द्वारा की जाती है, जो इस मंदिर की विशेष परंपरा है.
सड़क और रेल दोनों से आसान पहुंच
अहल्यास्थान सड़क और रेल दोनों मार्गों से जुड़ा हुआ है. यह दरभंगा मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर, सीतामढ़ी से करीब 60 किलोमीटर तथा दरभंगा-मुजफ्फरपुर फोरलेन के अतरबेल-बिठौली चौक से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.
