मगध मेडिकल में ''हीट इमरजेंसी'', बेड फुल, स्ट्रेचर और कुर्सियों पर इलाज

गया में आसमान से बरस रही आग (तापमान करीब 45 डिग्री सेल्सियस) अब सीधे इंसानी जिंदगियों पर भारी पड़ने लगी है. सरकारी दावों से इतर, जमीनी हकीकत यह है कि जिले के दो सबसे बड़े अस्पताल, अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल और सदर अस्पताल इस वक्त मरीजों के बोझ तले कराह रहे हैं. अस्पतालों के इमरजेंसी वार्ड ''वॉरजोन'' में तब्दील हो चुके हैं.

Gaya News : गया जी (जितेंद्र मिश्र). गया में आसमान से बरस रही आग (तापमान करीब 45 डिग्री सेल्सियस) अब सीधे इंसानी जिंदगियों पर भारी पड़ने लगी है. सरकारी दावों से इतर, जमीनी हकीकत यह है कि जिले के दो सबसे बड़े अस्पताल, अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल और सदर अस्पताल इस वक्त मरीजों के बोझ तले कराह रहे हैं. अस्पतालों के इमरजेंसी वार्ड ”वॉरजोन” में तब्दील हो चुके हैं. मगध मेडिकल के इमरजेंसी में हर दिन 100 से अधिक गंभीर मरीज पहुंच रहे हैं. आलम यह है कि अस्पताल में बेड कम पड़ गये हैं और मजबूरी में मरीजों का इलाज स्ट्रेचर, बेंच और कुर्सियों पर लिटाकर किया जा रहा है. यह स्थिति साफ तौर पर हमारे हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर की तैयारियों की पोल खोलतीहै. अस्पताल के आंकड़ों के इन्वेस्टिगेशन से पता चलता है कि इस भीषण गर्मी में आने वाले 70 फीसदी से अधिक मरीज वह हैं जो पहले से किसी न किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं. डॉक्टरों के मुताबिक, गर्मी केवल थकान या डिहाइड्रेशन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर के भीतर अंगों को फेल कर रही है.

हार्ट पेशेंट्स को साइलेंट अटैक का खतरा

मगध मेडिकल अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर डॉ देव कुमार चौधरी ने खुलासा किया कि तेज गर्मी में शरीर को ठंडा रखने के लिए दिल को सामान्य से दुगना परिश्रम करना पड़ताहै. इससे हार्ट रेट अनियंत्रित हो जाता है. जो लोग पहले से हार्ट फेलियर या बीपी के मरीज हैं, उनमें हीट स्ट्रेस के कारण सीने में दर्द और सांस फूलने की समस्या अचानक क्रिटिकल स्टेज में पहुंच रही है. गंभीर मामलों में यह सीधे हार्ट अटैक की वजह बन रहा है.

धूल ने हवा को जहरीला बनाया, अस्थमा और सीओपीडी के मरीजों को दिक्कत

मगध मेडिकल अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ प्रवीण कुमार अग्रवाल के अनुसार, गर्म हवाओं और उड़ती धूल ने हवा को जहरीला बना दिया है, जिससे अस्थमा और सीओपीडी के मरीजों की सांस की नलियां सिकुड़ रही हैं. सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि अत्यधिक डिहाइड्रेशन के कारण शुगर (डायबिटीज) के मरीजों का ब्लड शुगर लेवल अचानक शूट कर रहा है और इस स्थिति में मरीजों पर उनकी नियमित शुगर की दवाएं भी बेअसर साबित हो रही हैं. ऐसे मरीजों को तुरंत वेंटिलेशन या गहन निगरानी की जरूरत पड़ रही है.

गर्भवती महिलाओं और नवजातों पर मंडराता खतरा

इस मौसम में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर सबसे बड़ा रिस्क देखा जा रहा है. गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर का तापमान स्वाभाविक रूप से अधिक होता है, ऐसे में 45 डिग्री का बाहरी तापमान उनके और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है.मेडिवर्स हॉस्पिटल (गया) की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ तेजस्वी नंदन ने चेतावनी दी है कि इस मौसम में गर्भवती महिलाओं द्वारा की गयी मामूली लापरवाही भी भारी पड़ सकती है. तेज धूप में ज्यादा देर रहने से हीट स्ट्रोक, लगातार उल्टी, तेज सिरदर्द, और बेहोशी की समस्या आ सकती है. खान-पान में तला-भुना या मसालेदार भोजन इस खतरे को कई गुना बढ़ा देता है. महिलाओं को सलाह दी गयी है कि वे केवल सूती और ढीले कपड़े पहनें, शरीर में पानी की कमी न होने दें और हर छोटे अंतराल पर थोड़ा-थोड़ा भोजन लें.

क्या है प्रशासन का दावा

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि वे हर संभव कोशिश कर रहे हैं, लेकिन रोजाना 100 से अधिक इमरजेंसी मरीजों को संभालना मौजूदा संसाधनों में मुश्किल हो रहा है. सवाल यह उठता है कि जब हर साल गया में मई-जून के महीने में तापमान 45 डिग्री के पार जाता है, तो स्वास्थ्य विभाग ने पहले से अतिरिक्त बेडों, कूलिंग वार्डों और दवाओं का बैकअप क्यों तैयार नहीं रखा?

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Published by: JITENDRA KUMAR

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