बॉलीवुड की फिल्मों से हो चुके हैं बोर? देख डालिए ये साउथ की झन्नाटेदार मूवीज

South Indian Movies: अगर आप बॉलीवुड की फिल्में देख-देखकर बोर हो चुके हैं और सस्पेंस-थ्रिलर फिल्मों के शौकीन हैं, तो ये साउथ इंडियन फिल्में आपके वॉटलिस्ट में जरूर होनी चाहिए. दमदार कहानी और चौंकाने वाले क्लाइमैक्स वाली ये मूवीज आपको आखिर तक स्क्रीन से बांधे रखेंगी. देखें फिल्मों की पूरी लिस्ट…

South Indian Movies: अगर आप एक जैसी बॉलीवुड फिल्मों की कहानियों से बोर हो चुके हैं, तो साउथ सिनेमा आपके लिए ताजगी भरा अनुभव दे सकता है. दमदार कहानी, जबरदस्त सस्पेंस और शानदार एक्टिंग के कारण साउथ की फिल्में अब हिंदी दर्शकों के बीच भी तेजी से पसंद की जा रही हैं. खास बात यह है कि इन फिल्मों की कहानियां सिर्फ मनोरंजन ही नहीं करतीं, बल्कि कई बार आपको सोचने पर भी मजबूर कर देती हैं. अगर आप घर बैठे कुछ ऐसी फिल्में देखना चाहते हैं जो एकदम झन्नाटेदार हो और कहानी के आखिरी तक बांधे रखें, तो ये साउथ इंडियन फिल्में आपकी वॉचलिस्ट में जरूर होनी चाहिए.

आडुजीविथम

यह फिल्म सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि बेहद दर्दनाक और सच्ची दास्तान है. इसमें नजीब नाम के एक भारतीय युवक की कहानी दिखाई गई है, जो बेहतर भविष्य की तलाश में सऊदी अरब जाता है. लेकिन वहां पहुंचकर उसकी जिंदगी बदल जाती है और उसे रेगिस्तान में बंधक बनाकर बकरियां चराने के लिए मजबूर कर दिया जाता है.

जन गण मन

यह फिल्म सच, न्याय और सिस्टम के बीच की जटिलता को बेहद दिलचस्प तरीके से दिखाती है. कहानी एक कॉलेज प्रोफेसर की हत्या से शुरू होती है, जिसके बाद पूरे देश में हंगामा मच जाता है. शुरुआत में यह एक साधारण मर्डर केस लगता है, लेकिन फिल्म का आखिरी कोर्टरूम ड्रामा सबको चौंका देता है.

नायट्टू

‘नायट्टू’ का मतलब होता है शिकार और फिल्म की कहानी भी इसी विचार के इर्द-गिर्द घूमती है. यह एक राजनीतिक थ्रिलर है, जिसमें सिस्टम की सच्चाई को बेबाकी से दिखाया गया है. कहानी तीन पुलिसकर्मियों की है, जो एक हादसे के बाद खुद ही सिस्टम के निशाने पर आ जाते हैं और अपनी जान बचाने के लिए भागते रहते हैं.

मिन्नल मुरली

सुपरहीरो फिल्मों के शौकीनों के लिए यह एक शानदार विकल्प है. कहानी एक साधारण दर्जी की है, जिस पर बिजली गिरने के बाद उसे खास ताकतें मिल जाती हैं. लेकिन उसी गांव का एक दूसरा व्यक्ति भी ऐसी ही शक्तियां हासिल कर लेता है और वह खलनायक बन जाता है. यही टकराव फिल्म को दिलचस्प बना देता है.

इरट्टा

अगर आपको इन्वेस्टिगेटिव थ्रिलर पसंद है तो यह फिल्म जरूर देखनी चाहिए. कहानी एक पुलिस स्टेशन में हुई रहस्यमयी मौत से शुरू होती है. जांच की जिम्मेदारी मृत पुलिसकर्मी के जुड़वां भाई को मिलती है. जांच के दौरान अतीत के कई ऐसे रहस्य सामने आते हैं जो कहानी को और भी डार्क बना देते हैं.

कैडेवर

यह फिल्म क्राइम थ्रिलर और मेडिकल साइंस का दिलचस्प मिक्सचर है. कहानी एक फोरेंसिक सर्जन और एक हाई-प्रोफाइल मर्डर केस के इर्द-गिर्द घूमती है. मामला तब और उलझ जाता है जब जेल में बंद एक कैदी हत्या कबूल करता है और आने वाली कई हत्याओं के बारे में भी खुलासा करता है.

7th डे

यह एक सस्पेंस से भरी मनोवैज्ञानिक क्राइम थ्रिलर है. फिल्म की कहानी एक सस्पेंडेड क्राइम ब्रांच ऑफिसर और पांच दोस्तों के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनकी जिंदगी अचानक एक रहस्यमयी घटना से उलझ जाती है. फिल्म का सस्पेंस अंत तक दर्शकों को बांधे रखता है.

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By Aniket kumar

अनिकेत कुमार प्रभात खबर के साथ पिछले दो वर्षों से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. वे मुजफ्फरपुर समेत उत्तर बिहार के आठ प्रमुख जिलों—मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सीतामढ़ी, समस्तीपुर, मधुबनी, शिवहर, बेतिया और मोतिहारी—की डिजिटल टीम को लीड करते हैं. पत्रकारिता में उन्हें करीब पांच वर्षों का अनुभव है.

डिजिटल पत्रकारिता के विभिन्न आयामों की समझ रखने वाले अनिकेत वर्तमान में हाइपरलोकल पत्रकारिता पर विशेष रूप से काम कर रहे हैं. हाइपरलोकल, क्राइम और राजनीति से जुड़ी खबरों में उनकी खास रुचि है. इससे पहले वे बिहार और उत्तर प्रदेश की राजनीतिक खबरों पर भी काम कर चुके हैं. खबरों के साथ-साथ वीडियो इंटरव्यू, वीडियो रिपोर्ट और सोशल मीडिया रील्स बनाने का अनुभव भी रखते हैं. YouTube और Instagram के कंटेंट एल्गोरिद्म और डिजिटल ऑडियंस की पसंद को समझते हुए वे खबरों को अलग-अलग डिजिटल फॉर्मेट में प्रस्तुत करने पर भी काम करते हैं.

अपने पत्रकारिता करियर में उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा उपचुनाव और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को जमीनी स्तर पर कवर किया है. प्रभात खबर के साथ बिहार विधानसभा चुनाव कवरेज के दौरान उन्होंने करीब 50 विधानसभा क्षेत्रों का दौरा किया, जहां मतदाताओं से सीधे संवाद किया और प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में चौपाल कार्यक्रम किए. नेताओं से सीधे सवाल पूछने के साथ उन्होंने जनता के बीच जाकर कई जमीनी मुद्दों को वीडियो रिपोर्ट के जरिए सामने रखा. चुनाव के दौरान अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में समय बिताने और लोगों के बीच रहकर रिपोर्टिंग करने के अनुभव उन्हें डेस्क पर खबरों को बेहतर संदर्भ के साथ समझने और प्रस्तुत करने में मदद करते हैं.

प्रभात खबर से पहले वे राजस्थान पत्रिका और न्यूजट्रैक जैसे मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुके हैं. उन्होंने शुरुआती शिक्षा मुजफ्फरपुर में अंग्रेजी माध्यम से प्राप्त की और इसके बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की.

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