movie kissa court kachehari ka :राजेश शर्मा और बृजेन्द्र काला अभिनीत फिल्म” किस्सा कोर्ट कचहरी का “ने आज सिनेमाघरों में दस्तक दे दी है. इस फिल्म के लेखन और निर्देशन से रजनीश जयसवाल जुड़े हुए हैं. रजनीश बिहार के हाजीपुर से हैं. इस फिल्म के साथ -साथ उन्होंने हाजीपुर से मुंबई की जर्नी पर भी उर्मिला कोरी से बातचीत की.बातचीत के प्रमुख अंश
किस्सा कोर्ट कचहरी एक रियल घटना पर आधारित है , किस तरह से आप तक पहुंची
मीडिया न्यूज़ में ही इस घटना के बारे मालूम हुआ था. खबर जानने के बाद मुझे लगा यह कहानी सिर्फ अखबार के एक दो कॉलम में नहीं रहनी चाहिए बल्कि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचनी चाहिए क्योंकि यह हर मिडिल क्लास की कहानी है.मैंने उस फॅमिली को कांटेक्ट किया और कहानी को डिटेल में जाना.हमारे देश में न्याय व्यवस्था को किस तरह से तोडा मोड़ा जाता है, लेकिन आखिर कार न्याय की जीत होती है. यही कहानी है यह उम्मीद की कहानी है.
पिछले दिनों हिट एंड रन के केस ने देश भर में सुर्खियां बटोरी थी क्या आपकी फिल्म को और सामयिक बना जाता है ?
बिल्कुल इस फिल्म से लोग और ज्यादा जुड़ाव महसूस करेंगे.इसके साथ ही न्याय प्रणाली मजबूत हो और ज्यादा फास्ट्रैक कोर्ट बनें. ये फिल्म मजबूती से ये भी सन्देश देती है.
इस फिल्म की मेकिंग से जुड़ा सबसे मुश्किल पहलू क्या था ?
इस फिल्म के लिए निर्माता मिलना मुश्किल था. जैसा कि हमेशा रीयलिस्टिक फिल्मों के साथ होता है,लेकिन हम खुशनसीब थे कि आखिरकार हमें लवली फिल्म्स के अरुण सर ने सपोर्ट किया. इसके साथ ही फिल्म की शूटिंग आसान नहीं थी. फिल्म रियल लोकेशन पर शूट हुई है.वो भी ४५ डिग्री तापमान में. आप समझ सकती हैं कि मेरठ की उस गर्मी में शूटिंग कितनी मुश्किल रही होगी.
आपकी यह दूसरी फिल्म है,ये भी रियल घटना पर आधारित है ?
असल जिंदगी की कहानियां मुझे हमेशा ही अपील करती आयी हैं क्योंकि फिल्मों के साथ मेरी अपब्रिंगिंग प्रकाश झा सर के साथ रही है. रियल स्टोरीज शुरुआत से ही मुझे आकर्षित करती रही है.मुझे लगता है कि रीयलिस्टिक स्टोरी को रीयलिस्टिक अप्रोच के साथ बनाया जाए तो पब्लिक कनेक्ट करती है.
प्रकाश झा का आपने जिक्र किया ,उनके साथ कौन सी फिल्में आपने की ?
मैंने उनके साथ चक्रव्यूह ,आरक्षण और सत्याग्रह जैसी फिल्मों में अस्सिटेंट डायरेक्टर के तौर पर काम किया है
बिहार से मुंबई की जर्नी कैसे शुरू हुई थी ?
मैं बिहार के हाजीपुर से हूँ लेकिन आगे की पढाई के लिए दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज चला गया था. वही पढाई करते हुए मैंने चार साल तक पंडित एन के शर्मा के साथ थिएटर किया.पंडित जी के साथ मनोज बाजपेयी,आशुतोष राणा, पीयूष मिश्रा जैसे कई बड़े नाम भी जुड़े रहे हैं. थिएटर करते हुए अचानक एक पारिवारिक घटना की वजह से मुझे बिहार आना पड़ा और फॅमिली बिजनेस ज्वाइन करना पड़, लेकिन जैसे ही चीजें सेटल हुई. मैंने पटना में थिएटर ज्वाइन कर लिया. वही पर मेरी मुलाक़ात प्रकाश झा सर से हुई और फिर मुंबई का सफर शुरू हो गया.
क्या हमेशा से निर्देशक ही बनना था ?
(हंसते हुए )शुरुआत में मुझे भी एक्टर ही बनना था,लेकिन दिल्ली और पटना के थिएटर में जुड़ते हुए मैंने पाया कि मैं नाटकों के निर्देशन को एक्टिंग से ज्यादा एन्जॉय करता हूँ. जिसके बाद मैंने निर्देशन का ही फैसला कर लिया.
बिहार की किसी घटना पर फिल्म बनाने की भी योजना है ?
मेरी एक फिल्म डीएनए आगामी मई में शूटिंग फ्लोर पर जायेगी. उस फिल्म के बाद एक बिहार की कहानी पर फिल्म बनाने की योजना है. समस्तीपुर की एक रियल घटना पर फिल्म होगी. फिलहाल स्क्रिप्ट पर काम चल रहा है.
मुंबई में रहते हुए बिहार से कितना जुड़ाव रख पाते हैं ?
बिहार से बहुत जुड़ा हुआ हूँ। महीने डेढ़ महीने में जाता ही हूँ। मेरा परिवार और दोस्त सब वहीँ से हैं तो आना जाना लगातार होता रहता है.
