फ़िल्म – भूत बंगला
निर्माता – एकता कपूर
निर्देशक – प्रियदर्शन
कलाकार – अक्षय कुमार,तब्बू ,जीशु सेनगुप्ता, मिथिला पारकर ,वामिका गब्बी,असरानी,परेश रावल,राजेश शर्मा,राजपाल यादव और अन्य
प्लेटफार्म -सिनेमाघर
रेटिंग – दो
bhooth bangla movie review :हेरा फेरी, भूल भुलैया जैसी फिल्मों में साथ में काम कर चुकी अभिनेता अक्षय कुमार और निर्देशक प्रियदर्शन की आइकॉनिक जोड़ी 14 साल बाद आज सिनेमाघरों में रिलीज हुई फिल्म’ भूत बंगला’ से वापसी कर रही है. यह जोड़ी अपनी इस हॉरर कॉमेडी जॉनर वाली फिल्म से क्या डराने के साथ साथ हंसाने में भी कामयाब हुई है. परदे पर ‘भूल भुलैया’ वाला जादू फिर से दोहराया गया है या मैजिक मिसिंग है.इसके लिए पढ़े यह पूरा रिव्यु
ये है फिल्म की कहानी
कहानी की शुरुआत उतर भारत के गांव मंगलपुर रेलवे स्टेशन पर एक कहानी से शुरू होती है. जिसमें कहानी फ्लैशबैक में चली जाती है. कहानी कई साल पुरानी है.जब मंगलपुर में किसी की शादी नहीं होती थी क्योंकि दुल्हनों को वधुसुर नामक एक राक्षस उठा ले जाता है.जिसके बाद कहानी लंदन पहुँच जाती है.लन्दन में अर्जुन आचार्य (अक्षय कुमार )अपने पिता (जीशु सेनगुप्ता )और बहन (मिथिला )के साथ रहता है.अर्जुन के पास काम नहीं है इसलिए उसने बहुत लोगों से उधार ले रखा है. उसकी इस उधारी की आदत से पिता परेशान है. पिता की परेशानी की वजह बेटी भी है.वह अंधविश्वासी परिवार में शादी करना चाहती है.यह सब चल ही रहा होता है कि मंगलपुर से एक वसीयत लंदन पहुँच जाता है,मालूम पड़ता है कि उनके दादाजी ने उनके नाम 500 करोड़ की एक हवेली कर दी है. अर्जुन सोचता है कि वह अपने कर्जों से अब मुक्त हो जाएगा. साथ ही वह इसी हवेली में अपनी बहन की शादी करवाने की भी प्लानिंग करता है,लेकिन मंगलपुर में तो वधुसुर है. जो नयी नवेली दुल्हनों को उठा ले जाता है.क्या अर्जुन की बहन बच पाएगी. वधुसुर का रहस्य क्या है. क्या अर्जुन का रिश्ता शापित हवेली और मंगलपुर से है. इन सब सवालों के इर्द गिर्द आगे की फिल्म बुनी गयी है.
कई फिल्मों की दिलाती है याद
सबसे पहले बात कहानी की. फिल्म का पहला हिस्सा हल्का फुल्का है. सेकेंड हाफ में कहानी एकदम उलट जाती है.फिल्म कई फिल्मों की याद दिलाती है.यह कहना गलत ना होगा. शुरुआत में हॉरर की क्लासिक फिल्म जानी दुश्मन की तो सेकेंड हाफ में फ्लैशबैक वाला सीन भूल भुलैया की.वामिका के किरदार में स्त्री की झलक है. सेकेंड हाफ में वधुसुर की कहानी में एकता कपूर के किसी टेलीविज़न शो वाली छाप भी मिलती है.कहानी कमजोर रह गयी है. इंटरवल से पहले का दृश्य चौंकाता है लेकिन सेकेंड हाफ परदे पर कुछ खास कहानी और स्क्रीनप्ले में जोड़ नहीं पाया है.रही सही कसर कमजोर क्लाइमेक्स ने पूरी कर दी है. फिल्म के फ्लैशबैक में जिस तरह का किरदारों का लुक दिया गया है. वह बनावटीपन ज्यादा लिए हुए हैं.फिल्म शुरुआत में कई साल पहले की कहानी खुद को बताती है.लेकिन नोकिया के कीपैड वाले फ़ोन देखकर यह समझ आता है कि फिल्म की कहानी उतनी भी पुरानी नहीं है.लेखकों का कालखंड को लेकर यह कन्फ्यूजन समझ से परे है.
प्रियदर्शन की कॉमेडी से मैजिक है मिसिंग
कॉमेडी की दुनिया में अभिनेता अक्षय कुमार और निर्देशक प्रियदर्शन की जोड़ी पावरफुल मानी जाती है. कई कल्ट फिल्में और कभी ना भूलने वाले संवाद दिए हैं.प्रियदर्शन अपनी सिचुएश्नल और मिसअंडरस्टैंडिंग कॉमेडी के लिए जाने जाते हैं.प्रियदर्शन का वह मैजिक इस फिल्म से मिसिंग है. कॉमेडी बहुत लाउड हो गयी है.कॉमेडी के नाम पर सब एकदूसरे पर जोर जोर से चिल्ला रहे हैं. पूरी फिल्म में मुश्किल से कुछ दृश्यों में हंसी आयी है. आइकोनिक बहन डर गयी वाले सीन को एक बार फिर रिक्रिएट किया गया है. जो अच्छा बन पड़ा है. प्रियदर्शन अपनी फिल्मों में कॉमेडी का लेवल बढ़ाने के लिए जिस तरह से एन्सेंबल कास्ट का उपयोग करते हैं.वह भी इस फिल्म में प्रभावी नहीं बन पाया है क्योंकि फिल्म के डायलॉग और सिचुएशन कमजोर रह गए हैं. फिल्म के हॉरर एलिमेंट की बात करें तो वह प्रभावी बना है ,लेकिन क्लाइमेक्स के सीन में ग्राफिक्स में सबकुछ धुंधला रह गया है.गीत संगीत में रामजी आके भला करें को छोड़ दें तो कुछ भी याद नहीं रह जाता है.बाकी के पहलू ठीक ठाक हैं.
चित परिचित अंदाज में अक्षय कुमार
भूत बंगला अक्षय कुमार की फिल्म है. वह फिल्म में दोहरी भूमिका में हैं.वह अपने चित परिचित अंदाज में ही नज़र आये हैं.सपोर्टिंग रोल में राजपाल यादव,असरानी और परेश रावल ने उनका साथ दिया है.वामिका गब्बी और तब्बू के लिए फिल्म को करने को ज्यादा कुछ नहीं था. उनसे ज्यादा स्पेस फिल्म में मिथिला पारकर को मिला है.स्वर्गीय अभिनेता असरानी को परदे पर देखना सुखद है.राजेश शर्मा ,जीशु सेनगुप्ता,जाकिर हुसैन सहित बाकी के किरदारों ने भी अपनी -अपनी भूमिका के साथ न्याय किया है.
