आतंक के बीच जिंदगी की जंग दिखाती है 'भारत भाग्य विधाता', दिल छू जाएगी कहानी

भारत भाग्य विधाता मूवी रिव्यू: कंगना रनौत की यह फिल्म आतंकवादी हमले के बीच फंसे डॉक्टरों, नर्सों और मरीजों की बहादुरी की कहानी दिखाती है. जानें कैसी है फिल्म.

मूवी रिव्यू: भारत भाग्य विधाता
रेटिंग: 3.5/5

भारत भाग्य विधाता एक ऐसी फिल्म है जो आतंकवादी हमले के दौरान अस्पताल में फंसे लोगों की कहानी दिखाती है. यहां मरीज, डॉक्टर, नर्स और छोटे-छोटे बच्चे अपनी जान बचाने की कोशिश कर रहे होते हैं. हर तरफ डर का माहौल है, लेकिन फिर भी कुछ लोग हिम्मत नहीं हारते और दूसरों की मदद करते रहते हैं.

फिल्म में क्या खास है?

ज्यादातर आतंकवादी हमलों पर बनी फिल्मों में एक्शन और लड़ाई ज्यादा दिखाई जाती है, लेकिन भारत भाग्य विधाता अलग रास्ता अपनाती है. यह फिल्म उन आम लोगों की कहानी बताती है जो मुश्किल समय में भी इंसानियत और हिम्मत नहीं छोड़ते. फिल्म आपको डर के साथ-साथ उम्मीद का एहसास भी कराती है.

कंगना रनौत का अभिनय कैसा है?

कंगना रनौत ने फिल्म में बहुत अच्छा काम किया है. उन्होंने अपने किरदार को बहुत सादगी और ईमानदारी से निभाया है. कई जगह उनकी आंखें ही उनके भाव बता देती हैं. उनके अलावा गिरिजा ओक, रसिका अगाशे और स्मिता तांबे ने भी शानदार अभिनय किया है.

फिल्म का निर्देशन और तकनीकी पक्ष

निर्देशक मनोज तपाड़िया ने फिल्म को बिना ज्यादा ड्रामा और दिखावे के पेश किया है. अस्पताल के अंदर का माहौल बहुत वास्तविक लगता है. कैमरा वर्क और बैकग्राउंड म्यूजिक कहानी को और प्रभावशाली बनाते हैं. फिल्म देखते समय ऐसा लगता है जैसे आप भी उन लोगों के साथ उसी अस्पताल में मौजूद हैं.

क्लाइमेक्स क्यों है खास?

फिल्म का अंत इसकी सबसे बड़ी ताकत है. यहां कोई सुपरहीरो नहीं आता और न ही कोई फिल्मी चमत्कार होता है. इसके बजाय आम लोगों की हिम्मत, कर्तव्य और जीने की इच्छा को दिखाया गया है. यही बात क्लाइमेक्स को दिल छू लेने वाला बनाती है.

देखें या नहीं?

अगर आपको सच्ची घटनाओं से प्रेरित, भावनात्मक और इंसानियत का संदेश देने वाली फिल्में पसंद हैं, तो भारत भाग्य विधाता जरूर देख सकते हैं. यह फिल्म बताती है कि मुश्किल समय में भी कुछ लोग अपनी बहादुरी और सेवा से दूसरों के लिए उम्मीद की किरण बन जाते हैं.

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लेखक के बारे में

Published by: Sheetal Choubey

शीतल चौबे एक एंटरटेनमेंट जर्नलिस्ट हैं, जो बॉलीवुड, साउथ सिनेमा, बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट्स, ओटीटी रिलीज, फिल्मी गॉसिप्स, ट्रेंडिंग विवाद और सेलेब्रिटी इंटरव्यूज पर सक्रिय रूप से काम करती हैं. उन्हें फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी हर हलचल पर नजर रखना पसंद है, चाहे वो किसी फिल्म की कमाई हो, नया रिकॉर्ड हो, या फिर किसी वेब सीरीज का ओटीटी पर धमाका. एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स को समझना और उन्हें आसान, दिलचस्प और रीडर-फ्रेंडली भाषा में ऑडियंस तक पहुंचाना उनकी खासियत है. उनका फोकस ऐसी खबरों पर रहता है जो न सिर्फ जानकारी दें, बल्कि पाठकों को स्क्रॉल रोकने पर मजबूर कर दें. मूल रूप से बिहार के बक्सर की रहने वाली शीतल की शुरुआती पढ़ाई उत्तर प्रदेश के कानपुर से हुई. इसके बाद उन्होंने मध्य प्रदेश की माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शब्द सांची से की, जहां उन्होंने एजुकेशन और एंटरटेनमेंट दोनों बीट्स पर काम किया. यहां उन्होंने कंटेंट राइटिंग के साथ वॉइस ओवर और Adobe Premiere Pro पर बेसिक वीडियो एडिटिंग की स्किल भी हासिल की. करीब एक साल के अनुभव के बाद 2024 में वह प्रभात खबर डिजिटल से जुड़ीं, जहां वह वर्तमान में बॉक्स ऑफिस, बॉलीवुड, साउथ सिनेमा और एंटरटेनमेंट से जुड़ी खबरों पर सक्रिय रूप से काम कर रही हैं. वह लगातार डिजिटल मीडिया में खुद को अपडेट करते हुए एंटरटेनमेंट जर्नलिज्म में अपनी एक मजबूत पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं.

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