Bollywood on Pay Disparity: बॉलीवुड में लंबे समय से जेंडर पे गैप (Gender Pay Gap) यानी महिला और पुरुष कलाकारों की फीस में अंतर को लेकर बहस होती रही है. कई बड़ी एक्ट्रेसेस ने खुलकर कहा है कि समान सफलता और लोकप्रियता होने के बावजूद उन्हें अपने मेल को-स्टार्स जितनी फीस नहीं मिलती. अक्सर इस मुद्दे के लिए फिल्म के डायरेक्टर या प्रोड्यूसर को जिम्मेदार ठहराया जाता है, लेकिन इंडस्ट्री के कई लोगों का मानना है कि इसकी असली वजह सिर्फ निर्माता या निर्देशक नहीं, बल्कि दर्शकों की पसंद, स्टार सिस्टम और बॉक्स ऑफिस की सोच भी है.
आइए जानते हैं कि आखिर बॉलीवुड में जेंडर पे गैप क्यों बना हुआ है और किन एक्ट्रेसेस ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखी है.
Why a huge Difference: आखिर क्यों है फीस में इतना बड़ा अंतर?
फिल्म इंडस्ट्री में किसी भी कलाकार की फीस कई बातों पर निर्भर करती है, जैसे उसकी स्टार पावर, पिछली फिल्मों का बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन, ब्रांड वैल्यू और फिल्म के लिए उसकी मार्केट डिमांड. लंबे समय से बॉलीवुड में यह धारणा रही है कि किसी फिल्म की कमाई का सबसे बड़ा आधार मेल सुपरस्टार होते हैं। इसी वजह से उन्हें अधिक फीस दी जाती है.
हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में कई महिला प्रधान फिल्मों ने शानदार प्रदर्शन किया है. इसके बावजूद कई एक्ट्रेसेस का कहना है कि समान सफलता मिलने के बाद भी उन्हें बराबर भुगतान नहीं किया जाता.
Dipika Padukone on Pay Disparity: दीपिका पादुकोण ने उठाई थी बराबरी की मांग
दीपिका पादुकोण कई बार जेंडर पे गैप पर अपनी राय रख चुकी हैं. उन्होंने कहा था कि समान मेहनत करने के बावजूद महिलाओं को पुरुष कलाकारों से कम फीस मिलती है. दीपिका का मानना है कि कलाकार की फीस उसके काम और योगदान के आधार पर तय होनी चाहिए, न कि उसके जेंडर के आधार पर. दीपिका ने बताया कि उन्होंने कुछ फिल्मों में अपने किरदार और योगदान के अनुसार बेहतर फीस की मांग भी की थी. उन्होंने यह भी कहा कि बराबरी की बात केवल फिल्मों तक सीमित नहीं है, बल्कि हर पेशे में लागू होनी चाहिए.
Kriti Senon on Favouratism: कृति सेनन ने बताई थी मेल स्टार्स को मिलती है ज्यादा सुविधाएं
बॉलीवुड एक्ट्रेस कृति सेनन ने एक इंटरव्यू में बताया कि कई बार फिल्म में बराबर का रोल होने के बावजूद उन्हें अपने मेल को-स्टार्स जैसी सुविधाएं नहीं मिलती थीं. उन्होंने कहा कि कई मौकों पर मेल लीड एक्टर को बड़ी वैनिटी वैन, बड़ा होटल रूम और प्रमोशन के लिए बेहतर कार दी जाती थी, जबकि उनसे समझौता करने की उम्मीद की जाती थी. कृति ने यह भी कहा कि फिल्मों के प्रमोशन की योजना अक्सर मेल एक्टर्स को ध्यान में रखकर बनाई जाती है. ऐसे में फीमेल लीड का रोल अहम होने के बावजूद उन्हें उतनी पहचान और लाइमलाइट नहीं मिल पाती. उन्होंने यह भी बताया कि, समय के साथ चीजें पहले से बेहतर हुई हैं, लेकिन इंडस्ट्री में पूरी तरह बराबरी का माहौल बनने में अभी काफी समय लगेगा.
Priyanka Chopra on Equal Pay: प्रियंका चोपड़ा ने कहा बॉलीवुड में कभी इक्वल पेमेंट नहीं मिला
प्रियंका चोपड़ा जोनास ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि बॉलीवुड में उन्हें अक्सर अपने मेल को-स्टार्स की तुलना में काफी कम फीस मिलती थी. उन्होंने कहा था कि कई बार उन्हें पुरुष कलाकार की फीस का केवल एक छोटा हिस्सा ही दिया जाता था.
प्रियंका ने यह भी कहा कि हॉलीवुड में काम करने के दौरान उन्हें पहली बार किसी प्रोजेक्ट में अपने मेल को-स्टार के बराबर भुगतान मिला, जिसे उन्होंने अपने करियर का अहम अनुभव बताया. उनके मुताबिक, मेल और फीमेल एक्टर्स के बीच फीस का यह अंतर लंबे समय से बना हुआ है और फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं को बराबर मौके और बेहतर प्रतिनिधित्व देने की जरूरत पर जोर दिया है.
Kangana Ranaut Raised This Issue : कंगना रनौत ने भी किया था सवाल
कंगना रनौत का कहना है कि अगर कोई अभिनेत्री किसी फिल्म को अपने दम पर सफल बना सकती है, तो उसे भी उसी स्तर की फीस मिलनी चाहिए. उन्होंने कई मौकों पर कहा कि महिला कलाकारों की फिल्मों को भी उतनी ही गंभीरता से देखा जाना चाहिए जितनी पुरुष कलाकारों की फिल्मों को. कंगना का मानना है कि जब महिला प्रधान फिल्में अच्छा कारोबार करती हैं, तब भी फीस के मामले में बराबरी नहीं दिखाई देती. कंगना ने यह भी बताया कि इंडस्ट्री में ज्यादातर बड़े फैसले पुरुष लेते हैं, जिसकी वजह से कई बार महिलाओं को बराबर के मौके नहीं मिल पाते.
Taapsee Pannu on Fees: तापसी पन्नू ने भी उठाया था सवाल
तापसी पन्नू ने कई बार कहा है कि महिला कलाकारों को अपनी फीस बढ़ाने के लिए लगातार खुद को साबित करना पड़ता है, जबकि पुरुष कलाकारों के साथ कई बार ऐसा नहीं होता. उन्होंने कहा कि महिला प्रधान फिल्मों की सफलता के बाद भी यह अंतर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.
Only Directors and Producers are Responsible: क्या सिर्फ डायरेक्टर और प्रोडूसर जिम्मेदार हैं ?
अक्सर माना जाता है कि निर्माता और निर्देशक ही फीस तय करते हैं, लेकिन सच्चाई इससे थोड़ी अलग है. फिल्म का बजट कई कारोबारी पहलुओं को देखकर तय किया जाता है. इसमें निवेश करने वाले स्टूडियो, डिस्ट्रीब्यूटर, फाइनेंसर और ट्रेड एक्सपर्ट भी यह आकलन करते हैं कि किस कलाकार के नाम पर कितनी कमाई होने की संभावना है.
यही वजह है कि कई निर्माता कहते हैं कि वे बाजार की मांग और अनुमानित कमाई के आधार पर फीस तय करते हैं. यदि किसी स्टार की मौजूदगी से टिकट बिक्री बढ़ने की उम्मीद होती है, तो उसकी फीस भी उसी हिसाब से बढ़ जाती है.
Viewers Play a Key Role: दर्शक और स्टारडम भी निभाते हैं बड़ी भूमिका
जेंडर पे गैप की एक बड़ी वजह दर्शकों की पसंद और दशकों से बना स्टारडम भी है. लंबे समय तक बॉलीवुड में ऐसी फिल्में बनती रहीं जिनमें कहानी मुख्य रूप से मेल हीरो के इर्द-गिर्द घूमती थी. ऐसे में पूरी मार्केटिंग भी उन्हीं के नाम पर होती थी.
हालांकि अब धीरे-धीरे बदलाव देखने को मिल रहा है. महिला प्रधान फिल्मों को दर्शकों का अच्छा समर्थन मिल रहा है और कई एक्ट्रेसेस अपनी फिल्मों के दम पर बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल कर रही हैं. इससे इंडस्ट्री में फीस को लेकर सोच भी बदल रही है.
Is the Reality Changing: क्या सच में बदल रही है तस्वीर?
पिछले कुछ वर्षों में बॉलीवुड में कई महिला कलाकारों ने न सिर्फ मजबूत किरदार निभाए हैं, बल्कि अपनी फिल्मों से अच्छी कमाई भी की है. इसके चलते जेंडर पे गैप पर खुलकर चर्चा होने लगी है. अब कई प्रोडक्शन हाउस कलाकार की लोकप्रियता, फिल्म में योगदान और बॉक्स ऑफिस क्षमता को पहले से अधिक महत्व देने लगे हैं.
फिर भी इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का मानना है कि पूरी तरह समान वेतन की स्थिति तक पहुंचने में अभी समय लगेगा. इसके लिए केवल निर्माता या निर्देशक ही नहीं, बल्कि दर्शकों की सोच, निवेश का तरीका और स्टार सिस्टम - तीनों में बदलाव जरूरी है.
यह भी पढ़ें: कंगना रनौत ने बॉलीवुड में वेतन भेदभाव पर तोड़ी चुप्पी, कहा- ए-लिस्टर्स एक्ट्रेस फिल्मों के लिए फ्री…
